छप्पन भोग के पहले भगवान पशुपतिनाथ का रूद्राभिषेक कर शिखर पर ध्वजा चढ़ाई गई, जिसके बाद भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी प्रतिमा का नयनाभिराम श्रृंगार कर छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पित किया गया। रविवार को भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में प्रातः कालीन आरती मंडल के तत्वाधान में सावन माह की समाप्ति के उपलक्ष्य में पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में एक हजार थाल में छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पित किया गया।
भगवान को अर्पित किए गए नैवेद्य में कई प्रकार की मिठाइयां व नमकीन शामिल है। इसके पूर्व सुबह 11 बजे आरती मंडल द्वारा भगवान पशुपतिनाथ का विद्वान आचार्यों के आचार्यत्व में महारुद्राभिषेक व हवन का आयोजन किया गया। उसके बाद भगवान पशुपतिनाथ की आरती के पश्चात भगवान पशुपतिनाथ का नयनाभिराम श्रृंगार कर मंदिर गर्भगृह में एक हजार थाल में 56 भोग का नैवेद्य अर्पित किया गया।
भगवान पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में लगाए गए छप्पन भोग के नैवेद्य का दर्शन करने के लिए श्री अमरनाथ बर्फानी सेवा दल पंजाब की सदस्य भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यहां आकर मन अति प्रसन्न हुआ। भगवान पशुपतिनाथ की भव्य अष्टमुखी प्रतिमा अपने आप में ही निराली है।
50 साल से चली आ रही परंपरा
भगवान पशुपतिनाथ मंदिर प्रातः कालीन आरती मंडल के प्रवक्ता उमेश परमार ने बताया कि आरती मंडल द्वारा 50 साल से भी पहले से भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में 56 भोग का नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। उसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी 56 भोग का आयोजन किया गया है, जिसके दर्शन रात 11 बजे तक होंगे।