सीहोर जिले के रावतखेड़ा के किसानों ने गांव में रैली निकालकर पार्वती सिंचाई परियोजना का विरोध किया। गांव के मंदिर के बाहर धरना दिया। उनकी मांग है कि किसानों को सही मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
1 of 3
मंदिर के सामने महिला, पुरुषों और बच्चों ने सिंचित कृषि भूमि के दस्तावेजों के साथ धरना दिया।
- फोटो : अमर उजाला
सीहोर जिले के रावतखेड़ा के किसानों ने गांव में रैली निकालकर पार्वती सिंचाई परियोजना का विरोध किया। गांव के मंदिर के बाहर धरना दिया। उनकी मांग है कि किसानों को सही मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।
सीहोर जिले में प्रस्तावित पार्वती सिंचाई परियोजना के तहत निर्माणाधीन बांध में रावतखेड़ा गांव डूब जाएगा। यहां के किसान सिंचित भूमि और मकानों सहित डूबने वाली अचल संपत्ति का पूरा मुआवजा मांग रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने तोड़-मरोड़कर किसानों की पार्वती नदी, तालाब, कुओं, ट्यूबवेल से सिंचित पांच सौ एकड़ से अधिक कृषि भूमि को असिंचित घोषित कर ग्रामवासियों को मुआवजा देने का प्लान बनाया है।
विज्ञापन
2 of 3
किसानों ने गांव में रैली निकालकर पार्वती सिंचाई परियोजना का विरोध किया।
- फोटो : अमर उजाला
रावतखेड़ा में मंगलवार को शिवरात्रि भी नहीं मनाई गई। किसानों ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की सोई हुई आत्मा को जगाने के लिए ग्रामवासियों ने गांव में विरोध रैली निकाली गई। मंदिर के सामने महिला, पुरुषों और बच्चों ने सिंचित कृषि भूमि के दस्तावेजों के साथ धरना दिया। यही नहीं ग्रामवासियों ने गांव की चौपाल पर सरकार की सदबुद्धि के लिए रघुपति राजा राजाराम सरकार को सदबुद्धि दे भगवान भजन भी गाया। किसानों ने क्षेत्र की सांसद और विधायक पर भी सिंचित भूमि का पर्याप्त मुआवजा राशि दिलाने में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। किसानों ने क्षेत्र के पटवारी इलायस खान पर रिश्वत लेकर असिंचित भूमि को सिंचित घोषित करने एवं नायब तहसीलदार ज्योति पर अपनी हक की मांग कर रहे किसानों को जेल भेजने की धमकी देने सहित सरकारी दस्तावेजों में जानबूझकर गलत जानकारी भरने का आरोप लगाया है।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने तोड़-मरोड़कर प्लान बनाया है।
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि जनपद पंचायत सीहोर की ग्राम पंचायत आछारोही के ग्राम रावतखेड़ा का नामोनिशान मिटने वाला है। हल्का नम्बर 8 के तहत आने वाली किसानों की सिंचित भूमि का अधिग्रहण पार्वती नदी पर रेसाई गांव के पास बन रहे बांध के लिए किया गया है। इस परियोजना की लागत लगभग 1815.15 करोड़ है। बांध निर्माण का कार्य 2018 में शुरू हुआ है। बांध का निर्माण 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की जल भराव क्षमता 162 मिलियन घन मीटर है। इस परियेाजना में बनाए जा रहे बांध की ऊंचाई 24.95 मीटर रखी गई है। सीहोर जिले का महुआ खेड़ा एवं रावतखेड़ा गांव भी पूरी तरह से डूब में हैं।
रावतखेड़ा के किसान प्रद्युम्य सोलंकी, आत्माराम, लक्ष्मण सिंह, विशाल सोंलकी, देवेंद्र सोलंकी, ममता कुंवर, वशु सोलंकी, तमा बाई, दिलीप सिंह, महेंद्र सिंह, प्रेम कुंवर बाई, राजपाल सिंह, मांगीलाल, प्रेम सिंह, सुनीता बाई, गोविंद सिंह, अरुण सोलंकी, रामदयाल सिंह, बंटी सोलंकी, लाला बना, प्रमीण सिंह, कली बाई सहित अन्य के द्वारा मौके पर पहुंचकर सिंचित भूमि और मकानों अचल संपत्तियों का सही आकलन करने और सिंचित भूमि के मान से अधिग्रहित की गई भूमि का मुआवजा देने के साथ ही विस्थापन की स्थिति में कॉलोनी का निर्माण कराकर देने की मांग शासन प्रशासन से लगातार कर रहे हैं।