मझगांय सिंचाई परियोजना के प्रभावित किसानों और आदिवासियों का आंदोलन छठवें दिन भी जारी है। मुआवजे और पात्र हितग्राहियों के नाम सूची में जोड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी धरने पर जमे हुए हैं। इसी बीच एक बुजुर्ग महिला की मौत से आक्रोश बढ़ गया है।
जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में मझगांय सिंचाई परियोजना से प्रभावित आदिवासियों और किसानों का आंदोलन छठे दिन भी जारी है। जय किसान पार्टी के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में प्रदर्शनकारी डैम के पानी के ऊपर चिता बनाकर और गले में फांसी का फंदा डालकर सांकेतिक विरोध जता रहे हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और पात्र हितग्राहियों के नाम मुआवजा सूची में शामिल किए जाएं।
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इसी बीच आंदोलन में शामिल 75 वर्षीय आदिवासी महिला रमिया बाई की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि रमिया बाई 12 और 13 सितंबर को आंदोलन में शामिल हुई थीं। इसके बाद वे अपने घर लौट गईं, जहां उनकी तबीयत बिगड़ गई। बाद में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के कारण की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
रमिया बाई की मौत से आंदोलनकारियों में आक्रोश
रमिया बाई की मौत की खबर के बाद आंदोलनकारियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि वे लगातार छह दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी समस्याओं पर अब तक गंभीरता से ध्यान नहीं दिया है।
मुआवजे और नाम जोड़ने की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि मझगांय सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में कई किसानों की जमीन प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों को उनकी जमीन और नुकसान के अनुरूप उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा कई पात्र हितग्राहियों के नाम अभी तक मुआवजा सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छठे दिन भी आंदोलन जारी रहने से प्रशासन के सामने स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें आंदोलन में सहयोग मिल रहा है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान किया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। फिलहाल मझगांय सिंचाई परियोजना के प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का आंदोलन जारी है। आंदोलनकारियों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई और मुआवजे से जुड़ी मांगों पर है।