जोधइया बाई बैगा के पास अब तक पक्का मकान नहीं है।
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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इस बार बैगा कलाकार जोधइया बाई को भी पद्म पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। 83 वर्षीय जोधइया बाई इससे बेहद खुश हैं, लेकिन उन्हें चिंता इस बात की है कि अब तक उनके सर पर पक्की छत नहीं बन सकी है। उन्होंने एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इसकी मांग की थी। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
उमरिया जिले की करकेली जनपद की लोढ़ा पंचायत में निवासरत 83 वर्षीय अम्मा जोधइया बाई का है। उन्हें पद्मश्री देने के एलान के बाद फिर उनके पक्के मकान का मामला तूल पकड़ रहा है। आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच भी शुरू कर दी है। पद्मश्री और इससे पहले नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित हो चुकी अम्मा अब भी कच्चे मकान में रहती हैं। पीएम आवास योजना के लिए लंबे अरसे से भटक रही हैं।
पीएम से की थी मांग
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्के आवास देने का प्रावधान है। पद्मश्री से सम्मानित की जाने वाली जोधइया बाई ने प्रधानमंत्री से भी खुलकर बात की थी। उन्होंने आश्वासन भी दिया था लेकिन एक साल बीतने पर भी उन्हें आवास नहीं मिला है। कलेक्टर कृष्ण देव त्रिपाठी का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास दिलाने की कोशिश हम लगातार कर रहे हैं। मैं यहां तब नहीं था। मुझे नहीं पता कि यह अब तक क्यों नहीं हो सका। फिर भी जल्द ही हम उन्हें यह योजना का लाभ दिलाएंगे।
युवा टीम ने किया पौधरोपण
जोधइया बाई बैगा एक बैगा चित्रकार हैं, जिन्होंने अपना यह पुरस्कार अपने गुरु आशीष स्वामी जी को समर्पित किया है। उमरिया के युवाओं की ने 26 जनवरी को उनके साथ आम का पौधा लगाया और पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। जोधाइया बाई बैगा के साथ ही उनके गुरु आशीष स्वामी, संस्था के संचालक निमिष स्वामी ने पर्यावरण सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। हिमांशु तिवारी, शिवानी बर्मन, खुशी सेन समेत कई युवा उनके पास पहुंचे और पौधे लगाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।