प्रदेश में कई दशकों तक डाकुओं की रणस्थली रही चम्बल घाटी अब पर्यटन आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। पर्यटक अब इस घाटी के सदियों पुराने पुरा महत्व के अनेक मंदिरों को नजदीक से देख सकेंगे। चम्बल पर्यटन सर्किट के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा सात करोड़ 10 लाख रूपये स्वीकृत किए गए हैं।
सर्किट में श्योपुर मुरैना भिण्ड जिलों में पर्यटकों की सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम ने चम्बल सर्किट में पर्यटकों की सुविधा के लिए जल क्रीडा जैसे बोटिंग. राफ्टिंग केम्पिंग बर्ड वाचिंग तथा राष्ट्रीय चम्बल घडियाल अभयारण्य में बने इन्टरप्रिटेशन केंद्र से जानकारी आदि उपलब्ध करवाये जाने की व्यवस्था की है।
चम्बल घाटी के मुरैना, भिण्ड में पुरातत्व महत्व के अनेक स्थान मौजूद हैं। मुरैना के सिहोनिया में आठवीं शताब्दी के मंदिर महाभारत कालीन अवशेष पहाडगढ की ऐतिहासिक काल की मानवों की लिखी लिपियों से युक्त गुफाएं, मुगल और सिंधिया काल की भव्य इमारतें मौजूद हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए इन सभी जगहों पर पर्यटन की जानकारी और सुविधा केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार ककनमठ तथा शनिचरा मंदिर के पास पार्किंग व्यवस्था, संकेत पटल तथा पर्यटकों के रूकने की व्यवस्था भी की जा रही है।