सार
नीमच में किसान प्रकाश मालवीय गले में जूतों की माला पहनकर जनसुनवाई में पहुंचा। उसने एक पुलिस आरक्षक पर कृषि भूमि पर अवैध कब्जा, मिट्टी उत्खनन और फसल नष्ट करने का आरोप लगाया तथा कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन के समक्ष विरोध जताया।
जूतों की माला पहन कर जन सुनवाई में पहुंचा किसान
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के नीमच जिला मुख्यालय पर मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी और सनसनी का माहौल बन गया, जब साप्ताहिक जनसुनवाई में एक किसान अपने गले में जूतों की माला पहनकर पहुंच गया। कलेक्ट्रेट परिसर में किसान का यह अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन देख वहां मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और अन्य फरियादी हक्के-बक्के रह गए। पीड़ित किसान ने पुलिस विभाग में तैनात एक आरक्षक पर उसकी कृषि भूमि पर अवैध कब्जा करने और फसल बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया है।
यह है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीमच के ग्राम सावन निवासी किसान प्रकाश मालवीय लंबे समय से अपनी पैतृक कृषि भूमि को लेकर परेशान हैं। मंगलवार को वह हाथ में शिकायती आवेदन और गले में जूतों की माला लटकाए सीधे कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में दाखिल हो गया। पीड़ित प्रकाश मालवीय का आरोप है कि नीमच पुलिस में पदस्थ राहुल गुर्जर नामक पुलिसकर्मी ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर उसकी अनुपस्थिति का फायदा उठाया और उसकी कृषि भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया।
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खेत से मिट्टी खोदने और फसल नष्ट करने का आरोप
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र में पीड़ित किसान ने बताया कि दबंगों ने न केवल उसकी जमीन पर कब्जा किया, बल्कि वहां से बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध उत्खनन (खोदकर परिवहन) भी कर दिया। इस अवैध कृत्य के कारण खेत में खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई और भूमि का स्वरूप भी बिगड़ गया। किसान का कहना है कि वह इस मामले की शिकायत लेकर पूर्व में भी कई बार प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट चुका है, लेकिन पुलिसिया रसूख के कारण अब तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
जनसुनवाई जैसे संवेदनशील स्थान पर एक किसान को इस हाल में देखकर प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों ने किसान को शांत कराया और उसका शिकायती आवेदन लिया। पीड़ित किसान प्रकाश मालवीय ने कलेक्टर से मांग की है कि उसकी भूमि को भू-माफिया और दबंग पुलिसकर्मी के चंगुल से मुक्त कराया जाए, दोषियों के खिलाफ कानूनी मुकदमा दर्ज हो और उसकी जमीन को वास्तविक स्थिति में बहाल किया जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा और जनसुनवाई की व्यवस्थाओं को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन ने मामले की जांच कराकर उचित वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।