थाना देहात पुलिस ने बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय फर्जी डॉक्टर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने लोगों को बीमारी ठीक करने का झांसा देकर लाखों रुपये ठगने की साजिश रची थी।
पुलिस के अनुसार 13-14 दिसंबर 2025 को अज्ञात आरोपियों ने एक फरियादी से संपर्क किया और स्वयं को परिचित बताते हुए बीमारी ठीक करने की गारंटी दी। आरोपियों ने कथित डॉक्टर का मोबाइल नंबर दिया और अगले दिन फरियादी के घर आकर खुद को डॉक्टर बताकर जांच और “पेटेंट फार्मूला” की महंगी दवा से आराम दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद मोबाइल पर क्यूआर कोड दिखाकर फरियादी से एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए और दवा गाड़ी में रखी है कहकर मौके से फरार हो गए।
घटना की रिपोर्ट मिलने पर पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस. थोटा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन और एसडीओपी नर्मदापुरम जितेंद्र कुमार पाठक के मार्गदर्शन में थाना देहात और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। टीम ने आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खाते, सीसीटीवी फुटेज और वाहन के आधार पर तकनीकी साक्ष्य जुटाए। जांच में पता चला कि ठगी की राशि राजस्थान के एटीएम से निकाली गई थी।
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पुलिस टीम ने भोपाल और राजस्थान के आसपास घुमक्कड़ डेरों के इलाकों में तलाश कर घटना में प्रयुक्त वाहन के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में 50 वर्ष से अधिक उम्र के बीमार लोगों से संपर्क कर वे स्वयं को परिचित बताते थे। फिर मोबाइल पर तथाकथित डॉक्टर से बात कराकर महंगी दवा और खास फार्मूला का झांसा देकर ऑनलाइन राशि ट्रांसफर करवाते थे। घटना के बाद मोबाइल बंद कर सिम और मोबाइल फेंक देते थे और नई वारदातों के लिए नए सिम का उपयोग करते थे।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बीमारी ठीक करने के नाम पर किए जा रहे प्रलोभन में न आएं। बिना सत्यापन किसी को ऑनलाइन या नगद राशि न दें। संदिग्ध व्यक्ति दिखने पर नजदीकी थाना या कंट्रोल रूम को तुरंत सूचित करें।