मध्यप्रेदश में पारिवारिक विवाद का एक रोचक मामला सामने आया है। दरअसल, मंदसौर की रहने वाली ननद ने अपने ही भाभी को झोलाछाप डॉक्टर बताकर स्वास्थय मंत्री से शिकायत कर दी। जिसके बाद मंत्री ने इस मामले की जांच के लिए स्वास्थय विभाग की टीम को क्लिनिक पर भेजा।
अलोट में स्थित क्लिनिक के दस्तावेजों की जब जांच की गई तो उसका पंजीयन नहीं मिला। स्वास्थय विभाग ने प्रतिवेदन बनाकर कार्रवाई की बात कही। क्लिनिक का संचालन करने वाली डॉक्टर ने कहा कि पारिवारिक विवाद में ननद ने झूठी शिकायत दर्ज करवाई है। डॉक्टर ने बताया कि पंजीयन रिन्युअल के लिए ऑनलाइन डाल रखा है।
दरअसल, गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे रतलाम से डीएमओ डॉ जीएस गौड़, बीएमओ डॉ देवेंद्र मौर्य व टीम को साथ लेकर चतुर्वेदी क्लिनिक पहुंचे। टीम ने चार घंटो तक दस्तावेज खंगाले तथा उपलब्ध दवाइयों व मेडिकल सामग्री की सूची बनाई।
डॉ गौड़ ने कहा कि क्लिनिक संचालन का पंजीकरण नहीं मिला, इसलिए क्लिनिक को अवैध घोषित किया जाता है। जांच प्रतिवेदन सीएमएचओ को देंगे। रिपोर्ट मंत्री को भेजेंगे और क्लिनिक संचालिक डॉ वंदना चतुर्वेदी को नोटिस देंगे।
वहीं, इस मामले में डॉ वंदना ने कहा है कि वह बीएचएमएस हैं और उनके यहां कंसल्टिंग डॉक्टर बाहर से आकर इलाज करते हैं तो डीएमओ ने कहा कि कंसल्टिंग डॉक्टर की सेवाओं के साथ क्लिनिक संचालन कोई भी कर सकता है लेकिन इसका भी पंजीयन जरूरी है।
क्लिनिक का संचालन करने वाली डॉ वंदना चतुर्वेदी की शादी हितेंद्र चतुर्वेदी से हुई है। हितेंद्र की बहन यानी वंदना की ननद रीना त्रिवेदी की शादी मंदसौर हुई है। रीना व उसके भाई-भाभी के बीच पारिवारिक विवाद कोर्ट में विचाराधीन है।
रीना ने दलौदा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अजीत जैन को पत्र लिखा कि मेरी भाभी वंदना झोलाछाप हैं पर क्लीनिक चला रही है, इसकी जांच भी नहीं हो रही। जैन ने स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट को पत्र लिख दिया, जिसके बाद उन्होंने जांच के निर्देश दिए।