मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर कस्बे में 2011 में अपनी पांच बेटियों के सिर कुल्हाड़ी से काट देने वाले मगनलाल बरेला को बृहस्पतिवार तड़के सेंट्रल जेल जबलपुर में फांसी दी जाएगी।
सीहोर जिला व सत्र न्यायालय ने मगनलाल को आठ अगस्त को फांसी देने के लिए ब्लैक वारंट जारी किया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 22 जुलाई 2013 को बरेला की दया याचिका खारिज कर दी थी।
रामसिंह को दी जा रही प्रतिदिन फांसी:
मगनलाल को फांसी देने के लिए जेल प्रशासन ने फांसी का तख्ता तैयार कर लिया है। सेंट्रल जेल के पश्चिम भाग में फांसी का तख्ता बना हुआ है।
जो शुरुआत में तीन फीट और अंत में 1.2 फीट ऊंचा है। सेंट्रल जेल में फांसी के अभ्यास के लिए एक पुतला तैयार किया गया है, जिसे रामसिंह नाम दिया गया है। रामसिंह को फांसी देकर मगनलाल को फांसी देने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक मगनलाल बरेला को फांसी देने का काम वही जल्लाद करेगा जिसने मुंबई हमले के दोषी आतंकवादी मोहम्मद अजमल कसाब को फांसी पर लटकाया था।
वह जबलपुर पहुंच चुका है और फांसी के तख्ते पर दो बार ट्रायल भी कर चुका है। फांसी बृहस्पतिवार को सुबह दी जानी है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने बरेला की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की याचिकाएं पहले ही खारिज कर दी थीं। उसके बाद राष्ट्रपति ने भी उसकी दया याचिका खारिज कर दी।
प्रदेश में आखिरी फांसी
प्रदेश में आखिरी फांसी 1997 में केंद्रीय जेल जबलपुर में कामता प्रसाद को दी गई थी। इससे पहले 1996 में इंदौर केंद्रीय जेल में एक व्यक्ति को फांसी दी जा चुकी है।
बरेला ने अपनी पांच बेटियों आरती (4 वर्ष), सविता (5 वर्ष), लीला (6 वर्ष) जमुना (1 वर्ष) और फूल कुंवर (2 वर्ष) के सिर कुल्हाड़ी से काट दिए थे। बरेला ने 11 जून 2010 में अपनी मासूम बेटियों की हत्या दो पत्नियों के बीच संपत्ति विवाद के कारण की थी। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 302 के बीच आरोप पत्र पेश किया था।
गीता सार के बाद फांसी:
नियमानुसार जिस व्यक्ति को जेल में फांसी दी जाती है, उसे उसके धर्म के हिसाब से धर्म ग्रंथ का पाठ कराया जाता है। मगनलाल को हिंदू होने के नाते फांसी से पहले पंडित गीता का सार बताएंगे।
जबलपुर जेल में अब तक 234 लोगों को फांसी पर लटकाया जा चुका है। आजादी से पहले 202 और आजादी के बाद 30 लोगों को फांसी पर लटकाया जा चुका है।