मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) अपमानजनक संदर्भ के कारण विवाद में आ गई है। इसकी वजह है प्रश्नपत्र में भील समुदाय को लेकर पूछा गया एक सवाल। भाजपा विधायक राम दांगोरे जो एक भील हैं और खुद इस परीक्षा के एक उम्मीदवार हैं, उन्होंने कार्रवाई की मांग की हैं। उन्होंने इसे समुदाय का अपमान कहा है।
विवादित संदर्भ रविवार को राज्य में हुई परीक्षा के जनरल एपटीट्यूड टेस्ट के पैसेज में था। खंडवा केंद्र में परीक्षा देने के लिए पहुंचे दांगोरे ने बताया कि पैसेज में भीलों को आपराधिक मानसिकता वाले और शराबी कहा गया है। पंधाना विधानसभा सीट से विधायक 30 साल के दांगोरे ने पूछा है, 'कांग्रेस सरकार क्या करने की कोशिश कर रही है? जिस व्यक्ति ने यह पेपर सेट किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।'
भाजपा विधायक ने कहा, 'मैं एक अध्यापक हूं और भील समुदाय से आता हूं। हमारा एक लंबा इतिहास है और हमने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं प्रश्नपत्र में भील जनजाति के अपमानजनक संदर्भ से हैरान था।' बता दें कि भारत में 1.6 करोड़ से ज्यादा भील रहते हैं। जिसमें से 60 लाख मध्यप्रदेश में रहते हैं। वे देश के प्रमुख आदिवासी समुदाय में से हैं।
दांगोरे ने कहा, 'प्रश्नपत्र में कहा गया है कि भील समुदाय पूरी तरह से शराब के प्रभाव में हैं। पीएससी की परीक्षा में इस तरह की चीज कैसे लिखी जा सकती है? हमें निशाना बनाया जा रहा है।' परीक्षा में भील आइकन का भी जिक्र था। उन्होंने कहा, 'जीके की परीक्षा में अंतरराष्ट्रीय दृष्टिहीन क्रिकेटर सोनू गोलकर को लेकर एक सवाल था। जो भील हैं और उन्हें राज्य सरकार का सर्वोच्च खेल पुरस्कार विक्रम पुरस्कार मिला है।'
भीलों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का हुआ प्रयोग
दूसरा प्रश्नपत्र सेट करने वाले को स्पष्ट रूप से भील समुदाय को लेकर कोई ज्ञान या समझ नहीं है। उन्होंने भीलों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। मैंने पहले कभी किसी समुदाय के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं देखा। दांगोरे का कहना है कि वह पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा, 'हम प्रश्नपत्र सेट करने वाले को तत्काल हटाने की मांग करते हैं। मैं मैं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के लिए शिकायत करुंगा।'