कांग्रेस विधायकों के ‘बंदी’ रहने की स्थिति में शक्ति परीक्षण अर्थहीन
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार को सुबह राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी पार्टी के विधायकों को भाजपा द्वारा कर्नाटक पुलिस के नियंत्रण में बेंगलुरु में ‘बंदी’ के रुप में रखा गया है और ऐसी स्थिति में सदन में शक्ति परीक्षण कराना अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक होगा।
कमलनाथ में छह पृष्ठ के पत्र में लिखा है 'मैं यह स्मरण करना चाहूंगा कि 13 मार्च 2020 को आपसे मुलाकात के दौरान मैंने आपको अवगत कराया था कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के कई विधायकों को बंदी बना कर कर्नाटक पुलिस के नियंत्रण में रखकर उन्हें विभिन्न बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मैंने यह स्पष्ट किया था कि ऐसी परिस्थितियों में विधानसभा में किसी भी शक्ति परीक्षण का कोई औचित्य नहीं होगा और ऐसा करना पूर्ण रुप से अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक होगा। शक्ति परीक्षण का औचित्य तभी है जब सभी विधायक बंदिश से बाहर तथा पूर्ण रुप से दबावमुक्त हों।'
भाजपा में हिम्मत तो मेरी सरकार के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव
कमलनाथ ने सोमवार को मुख्य विपक्षी दल भाजपा को उनकी सरकार के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाने की चुनौती दी। कमलनाथ ने भाजपा को यह चुनौती तब दी है, जब मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने आज से शुरू हुए बजट सत्र की कार्यवाही राज्यपाल लालजी टंडन के अभिभाषण के तत्काल बाद 26 मार्च तक स्थगित कर दी।
विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कमलनाथ ने विधानसभा परिसर में शक्ति परीक्षण न कराए जाने पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'यदि भाजपा को लगता है कि हमारे पास बहुमत नहीं है, तो वह मेरी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए। वे ऐसा करने से क्यों कतरा रहे हैं?'