कमलनाथ और नरोत्तम मिश्रा। (फाइल फोटो)
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मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर असमंजस और अनिश्चितता बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने भी बुधवार को आदेश जारी किया कि चुनाव तो होंगे, पर नतीजे घोषित नहीं होंगे। OBC के लिए आरक्षित पदों पर निर्वाचन प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है। उनका फैसला अलग से होना है। शिवराज सिंह चौहान सरकार का दावा है कि चुनाव होंगे तो OBC रिजर्वेशन के साथ ही। ऐसे में कांग्रेस ने पूछा है कि यह स्थिति कब दूर होगी? इस पर सरकार का कहना है कि एक-दो दिन में कंफ्यूजन दूर होने की उम्मीद है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निर्वाचन प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगे हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में कहा कि पंचायत चुनाव तो OBC रिजर्वेशन के साथ ही होंगे। इस पर भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू कर दिए हैं। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने याचिका लगाई। उसकी वजह से ही OBC के लिए रिजर्व सीटों पर निर्वाचन को रोकना पड़ा है। दूसरी ओर, कांग्रेस कह रही है कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के वकीलों ने विरोध ही नहीं किया। इस पर दोनों के अपने-अपने तर्क है।
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने बुधवार को कहा कि अब मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मतगणना के सारणीकरण व निर्वाचन परिणामों की घोषणा संबंधी कार्रवाई को स्थगित कर दिया है। पता नहीं प्रदेश में पंचायत चुनावो पर असमंजस और अनिश्चितता कब समाप्त होगी? सरकार ने सदन में विश्वास दिलाया था कि बगैर OBC आरक्षण के प्रदेश में पंचायत चुनाव नहीं होंगे। नित-नए आदेशों से असमंजस का माहौल बढ़ता जा रहा है। सरकार स्थिति स्पष्ट करें कि वह आखिर चाहती क्या है? सरकार ओबीसी आरक्षण पर क्या कदम उठाने जा रही है? न्यायालय कब जा रही है? क्या निर्णय ले रही है?
वहीं, इस तरह के आरोपों पर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि एक-दो दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। अपना पाप छिपाने के लिए कांग्रेस OBC आरक्षण का मुद्दा उठा रही है। कांग्रेस के प्रवक्ता सैयद जाफर और जया ठाकुर ने याचिका लगाई है। राज्यसभा के सांसद विवेक तन्खा केस लड़ रहे हैं। कमलनाथ तो इमरजेंसी के समर्थक रहे हैं। उस समय कमलनाथ जी संजय गांधी, इंदिरा गांधी जी के खास थे। जब से मध्य प्रदेश में कमलनाथ आए तब से कांग्रेस चुनाव से भाग ही रही है। उपचुनावों में हारे और अब पंचायत चुनावों में हारेंगे। इस वजह से कोर्ट में गए थे, जिसका परिणाम प्रदेश भोग रहा है।