पंच पद पर निर्विरोध निर्वाचन के बाद संपूर्ण प्रदेश में पंचायतों के निर्वाचन को निरस्त करने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस डीके पालीवाल की ग्रीष्मकालीन विशेष खंडपीठ ने ग्राम पंचायत धूमा के निर्वाचन पर स्थगन की मांग संबंधित अंतरिम राहत के संबंध में याचिका को रेगुलर बैंच के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गोविन्द साहू की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि नवंबर 2021 में राज्य चुनाव आयोग ने पंचायतों के निर्वाचन की प्रक्रिया प्रारंभ की थी। उस प्रक्रिया के अंतर्गत याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत धूमा में पंच पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुआ था तथा केवल प्रमाण पत्र जारी किया जाना शेष था। किंतु राज्य निर्वाचन आयोग ने संपूर्ण प्रदेश की पंचायतों की निर्वाचन प्रक्रिया निरस्त कर दी।
याचिकाकर्ता के अनुसार याचिकाकर्ता के निर्विरोध निर्वाचन के पश्चात केवल निर्वाचन याचिका के माध्यम से ही उसके चुनाव को प्रभावित किया जा सकता है। राज्य चुनाव आयोग नियमों के अंतर्गत केवल चुनाव कार्यक्रम को स्थगित कर सकता है, उसको निरस्त नहीं कर सकता। मामले में न्यायालय ने अनावेदकों से जवाब तलब किया था, लेकिन हाल ही में याचिका के लंबित रहने के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग पुन: ग्राम पंचायत धूमा का चुनाव संपन्न कराने जा रही है जो कि अवैधानिक है। याचिकाकर्तागण की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, अपूर्व त्रिवेदी, आशीष तिवारी, अरविन्द सिंह चौहान आदि पैरवी कर रहे हैं।