स्थानीय ग्रामीणों कहना है कि चिल्हारी को तहसील का दर्जा दिया गया था। तहसील का कामकाज शुरू हो गया था। लेकिन राजनीतिक दबावों के कारण अमरपुर नई तहसील प्रस्तावित हो गई। वहां हम ग्रामीणों का जाना बहुत मुश्किल है, इसलिए चिल्हारी को ही तहसील बनाया जाए।
चिल्हारी को तहसील का दर्जा देने के लिए स्थानीय लोगों ने बुधावार को प्रभारी मंत्री रामकिशोर कांवरे को एक पत्र सौंपा। स्थानीयों ने पत्र के जरिए कहा है कि जनसंख्या के आधार पर चिल्हारी में आठ हजार से अधिक ग्रामीण मौजूद हैं। उसमें कहा गया है कि स्थानीयों और आसपास के गांव से ग्रामीणों को तहसील से जुड़े कामों के लिए मानपुर जाना परेशानी का सबब है। इसलिए चिल्हारी को तहसील का दर्जा दिया जाए।
विज्ञापन
इससे पहले इंदवार को तहसील का दर्जा देने प्रस्तावित किया गया था। लेकिन इंदवार डूब क्षेत्र यानी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। शासन की ओर से सर्वेक्षण कराया गया उसमें चिल्हारी सभी गांवों का केंद्र बिंदु है। चिल्हारी से लगभग 40 गांव से अधिक गांव लगे हुए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि चिल्हारी को तहसील का दर्जा दिया गया था। नायब तहसीलदार चिल्हारी में बैठने लगे थे। तहसील का कामकाज चिल्हारी में प्रारंभ हो गया था। लेकिन राजनीतिक दबावों के कारण अमरपुर नई तहसील प्रस्तावित हो गई। अगर अमरपुर तहसील का निर्माण होता है तो जुड़े गांवों से दूर होने के साथ-साथ कटनी जिले से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। इन कारणों से निश्चित ही सम्मिलित गांवों के ग्रामीणों को राजस्व संबंधी मामलों को लेकर अमरपुर जाना दुश्वारी से कम नहीं है।
विज्ञापन
पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रभारी मंत्री से कहा है कि ग्राम चिल्हारी करीब आधे सैकड़े से अधिक गावों से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। इसलिए चिल्हारी तहसील कार्यालय के लिए उपयुक्त होगा।