फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: प्रीतम लोधी पर उमा भारती का बड़ा बयान, बोलीं- प्रदेश की सत्ता में क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन बिगड़ा

Fri, 09 Sep 2022 07:50 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश की सत्ता और प्रशासन को लेकर उमा भारती ने बड़ा बयान दिया है। प्रीतम लोधी को लेकर पूछे एक सवाल के जवाब में भारती ने कहा कि प्रदेश की सत्ता और प्रशासन में क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन बिगड़ा हुआ है। यह असमानता कभी अराजकता उत्पन्न करेगी।
विज्ञापन
उमा भारती (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती ने मध्य प्रदेश की सत्ता और प्रशासन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सत्ता और प्रशासन में क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन बिगड़ा हुआ है। 
विज्ञापन


पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ग्वालियर के नेता प्रीतम लोधी को पार्टी से निष्कासित करने पर ओबीसी/एससी/एसटी और भीम आर्मी के द्वारा आयोजित संयुक्त कार्यक्रमों में उमड़ रही भीड़ को लेकर पूछे सवाल पर जवाब दिया कि प्रीतम लोधी के पिता जनसंघ में थे एवं राजमाता विजयराजे सिंधिया के करीबी सहयोगियों में से थे। भारती ने कहा कि 1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ही प्रीतम लोधी की ड्यूटी खजुराहो संसदीय क्षेत्र में लगाई थी। तब से उनसे परिचय है। भारती ने कहा कि वह मेरे ताकतवर सहयोगी रहे। भाजपा से मुझे निकालने पर प्रीतम लोधी ने भी भाजपा छोड़ दी। उमा भारती ने कहा कि भारतीय जनशक्ति पार्टी के समय उनको माफिया और अपराधी घोषित कर दिया गया।
 
उमा भारती ने कहा कि प्रीतम लोधी के ब्राह्मणों एवं कथा वाचकों पर टिप्पणी करने पर घोर आपत्ति दर्ज की और फोन कर प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर माफी मांगने को कहा। भारती ने कहा कि पार्टी से निकालने पर मैंने लोधी को समझाया कि इसमें कोई भेदभाव नहीं है। नूपुर शर्मा पर भी पार्टी ने कार्रवाई की है।
विज्ञापन

 
भारती ने कहा कि प्रदेश में क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन सत्ता और प्रशासन में बिगड़ा हुआ है। ग्वालियर, सागर, रीवा संभाग में संतुलन बिगड़ा हुआ है। यह ठीक नहीं है। इससे कभी भी असंतोष बिगड़ सकता है। मैंने यह इशारा पहले ही कर दिया था कि सत्ता में, शासन, और प्रशासन में भागीदारी में असमानता नहीं दिखनी चाहिए। स्वास्थ्य संस्थाओं में शिक्षण संस्थानों में भी बहुत असमानता आ चुकी है। यह असमानता विभिन्न रूपों में उभरकर अराजकता उत्पन्न करेंगी। इसलिए प्रीतम तो अलग मुद्दा हो गया है। अब तो मुद्दा आ गया है असमानता का। अभावग्रस्त समाज और सुविधायुक्त समाज।
 
उमा ने कहा कि सत्ता, शासन, प्रशासन, आर्थिक उत्थान, सामाजिक सम्मान सब में बराबरी की भागीदारी की मांग एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके लिए संयत भाषा का प्रयोग हो एवं किसी के भी द्वारा किसी जाति विशेष पर आरोप नहीं होना चाहिए। भारती ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में एससी/एसटी/ओबीसी को आरक्षण हो तथा गरीब सवर्णों को भी आर्थिक आधार पर प्राइवेट सेक्टर में 10 प्रतिशत का आरक्षण हो यह वो मानती है एवं स्वयं इस पर विश्वास करती हैं।
विज्ञापन

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें