शिवराज कैबिनेट के 30 मंत्रियों में नौ मंत्री सिंधिया समर्थक हैं। इनमें छह कैबिनेट और तीन राज्यमंत्री हैं। इन मंत्रियों में से कुछ को हटाने की बात कही जा रही है। आइये जानते हैं कि सिंधिया समर्थक मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड क्या कहता है...
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शिवराज सिंह चौहान-ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक साल से कम का समय बचा है। बताया जा रहा है कि इससे पहले शिवराज सिंह चौहान अपनी कैबिनेट में एक और विस्तार करने जा रहे हैं। इसमें कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधिया समर्थकों को भी हटाया जा सकता है। खासकर उन मंत्रियों का जिनका परफॉर्मंस सरकार के लिए किरकिरी बन सकता है। शिवराज कैबिनेट में 30 मंत्री हैं। इनमें नौ मंत्री सिंधिया गुट के बताए जाते हैं। इनमें छह कैबिनेट और तीन राज्यमंत्री हैं। इन मंत्रियों में से कुछ को हटाने की बात कही जा रही है। किसे हटाया जा सकता है, किसे नहीं, इसे यहां समझ सकते हैं।
टीम शिवराज में संभावित फेरबदल में क्या होगा, यह आने वाले समय में पता चल जाएगा। फिर भी सिंधिया कैम्प के मंत्रियों को हटाने की अटकलों को खारिज करने वाले विश्लेषक भी हैं। अब वरिष्ठ पत्रकार प्रभू पटैरिया को ही लीजिए। उनका कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कैंप के लोग अपनी शर्तों पर बीजेपी में शामिल हुए थे। बीजेपी सरकार में उन्हें न सिर्फ मंत्री बनाया बल्कि बड़े विभाग भी दिए गए। उपचुनाव में भी रिकॉर्ड मतों से उन्होंने जीत हासिल की। ऐसे में ज्यादातर को कैबिनेट से हटाना फिलहाल संभव नहीं लग रहा।
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प्रद्युमन सिंह तोमर मीडिया का अटेंशन पाने के लिए काफी कुछ करते हैं। कभी नंगे पैर चलते हैं, कभी गटर में उतरकर उसे साफ करने लगते हैं।
- फोटो : अमर उजाला
ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर की विभाग पर पकड़ कमजोर
तोमर की ऊर्जा विभाग में कोई पकड़ नहीं है। कर्मचारियों के आंदोलन को ही नहीं सुलझा पा रहे हैं। महंगी बिजली और ट्रांसफार्मर खराब होने की समस्या से जनता परेशान है। विभाग में कोई विशेष काम दिखाई नहीं देता। मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े दिखाई देते हैं। हाल ही में सड़क नहीं बनने को लेकर उन्होंने चप्पल नहीं पहनने का प्रण ले लिया। तोमर अपने क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय दिखते हैं। आम जनता के मुद्दे उठाने और अधिकारियों को डांटने से उन्होंने जमीनी पकड़ बनाई है। नाले-नालियों की सफाई को लेकर चर्चा में बने रहते हैं।
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स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी
- फोटो : सोशल मीडिया
मंत्री खुद डॉक्टर, फिर भी स्वास्थ्य विभाग में सुधार कम ही
डॉ. प्रभुराम चौधरी खुद डॉक्टर हैं। इस वजह से जब उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया तो लगा कि हालात में सुधार आएगा। कम से कम जनता और डॉक्टरों को होने वाली परेशानियों को वे समझेंगे और उन्हें जल्द से जल्द दूर करेंगे। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग में कोई बड़ा सुधार या परिवर्तन नहीं दिख रहा। विभाग के कामकाज को लेकर उनकी सक्रियता भी ज्यादा नहीं दिखती। पिछले साल कोरोना और डेंगू के केस बढ़ने पर विभाग उसे मैनेज करने में पूरी तरह फेल रहा। एंबुलेंस को लेकर शिकायतें बढ़ी है। स्वास्थ्य मंत्री अपने क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय दिखाई देते है। सांची में जमीनी पकड़ मजबूत है। कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने के बाद उपचुनाव में सबसे ज्यादा वोट से जीत हासिल करने वाले नेताओं में एक थे।
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जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट।
- फोटो : अमर उजाला
शिवराज के बाद नंबर दो की भूमिका में दिखते हैं तुलसी
यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया के किसी मंत्री ने अपनी पहचान शिवराज कैबिनेट में बनाई है, तो वह है तुलसी सिलावट। अक्सर टीम शिवराज में वे नंबर दो की तरह काम करते दिखाई देते हैं। अत्यधिक सक्रिय हैं। अपने प्रभार वाले जिले ग्वालियर में भी उतने ही दिख जाते हैं, जितना अपने विधानसभा क्षेत्र सांवेर या इंदौर के किसी कार्यक्रम में। मंत्री अपनी सक्रियता और मिलनसार व्यवहार के चलते बीजेपी में घुल-मिल गए है। इनके पास के विभागों का जनता से सीधे कोई फायदा नहीं है, लेकिन मंत्री अपने विभागों में काम को लेकर सक्रिय है। विभाग का कारम डेम लीकेज बड़ा मुद्दा बना। इसके बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी गई। लेकिन मॉनीटरिंग में गड़बड़ी से विभाग की नकारात्मक छवि बनी। सिलावट की इंदौर में बढ़ती सक्रियता से बीजेपी के नेताओं में नाराजगी बढ़ा रही है।
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मंत्री गोविंद सिंह राजपूत
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गोविंद सिंह राजपूतः साइबर तहसीलों से लेकर आरटीओ में इनोवेशन तक
गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी अलग छवि बनाई है। उन्होंने मंत्री के तौर पर राजस्व में साइबर तहसीलों का नवाचार किया है। इसी तरह परिवहन विभाग में भी कई बदलाव किए हैं। ग्रामीण परिवहन नीति की पहल का श्रेय उन्हें ही जाता है। विभागों को सिस्टम को ध्यान में रखकर चला रहे हैं। अपने कामों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। अपने क्षेत्र में भी एक्टिव हैं। नगरीय निकाय चुनावों में अपने इलाके में दबदबा कायम रखने में सफल रहे।
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मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया
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महेंद्र सिंह सिसोदियाः काम से ज्यादा विवादों की वजह से चर्चा में
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया काम के बजाय विवादों की वजह से सुर्खियां बटोर रहे हैं। विभाग ने पेसा कानून के प्रावधान बनाए हैं। इन्हें जनजातीय गौरव दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लागू भी कर दिया है। हालांकि, इसके अलावा विभाग में ऐसा कोई काम नहीं हुआ, जिसकी चर्चा हो। पेसा के नियमों को लेकर भी कांग्रेस हमलावर दिख रही है। इसके अलावा मंत्री अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। हाल ही में जिले के अधिकारियों के बहाने मुख्य सचिव तक को निरंकुश बता दिया था। लिहाजा, टीम शिवराज में नाराजगी भी दिखाते रहे हैं। विभाग में भी सक्रियता कम ही दिखती है।
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मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव
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इन्वेस्टर्स समिट को लेकर बढ़ा राज्यवर्धन सिंह का दबदबा
मंत्री राज्यवर्धन दत्तीगांव के पास औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग का जिम्मा है। अगले साल जनवरी में इंदौर में इन्वेस्टर समिट होना है। इसके लिए शिवराज के हमकदम बनकर मुंबई में उद्योगपतियों से मुलाकात की। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट में कुछ इनोवेशन किए हैं, जिससे उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की है। नए औद्योगिक क्षेत्रों की घोषणा से लेकर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एजेंडे में सबसे ऊपर है। ऐसे में उनकी स्थिति अन्य के मुकाबले बेहतर बताई जाती है।
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मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव
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बृजेंद्र सिंह यादव सिर्फ बंगले तक सीमित हैं
जब बात आती है लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग के राज्यमंत्री बृजेंद्र सिंह यादव की तो उनके पास कोई बड़ा उल्लेखनीय काम नहीं है। लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी (पीएचई) के काम की मॉनीटरिंग सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करते हैं। मंत्री यादव का सीधे-सीधे कोई दखल नहीं है। विभाग की बैठकों में भी दूरी रखते हैं। भोपाल में सिर्फ बंगले तक सीमित है। अपने प्रभार और क्षेत्र में ही ज्यादा फोकस दे रहे हैं।
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मंत्री ओपीएस भदौरिया
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ओपीएस भदौरिया अपने इलाके में ही सक्रिय हैं
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया के पास करने को कुछ ज्यादा है नहीं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग में पूरा दखल मंत्री भूपेंद्र सिंह का रहता है। इनके पास करने को कुछ खास नहीं है। ट्रांसफर-पोस्टिंग तक के अधिकार तक नहीं है। नाम के मंत्री हैं। इस वजह से पूरा ध्यान अपने क्षेत्र में दे रहे हैं। भोपाल में बंगले तक ही सीमित हैं।
सुरेश धाकड़ भी अपने इलाके तक सीमित हैं
लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री सुरेश धाकड़ का कार्यक्षेत्र अपने विधानसभा क्षेत्र ही है। राज्यमंत्री होने की वजह से ज्यादा अधिकार नहीं है। लोक निर्माण विभाग का ज्यादातर काम मंत्री गोपाल भार्गव देखते हैं। अपने क्षेत्र और प्रभार वाले जिलों में बैठकों तक सीमित हैं। हाल ही में 2023 का चुनाव शिवराज के नेतृत्व में लड़ने और उन्हें अपना नेता बताने के बयान को लेकर चर्चा में भी आए थे। भोपाल में सिर्फ अपने बंगले तक ही सीमत हैं।