भोपाल गैस कांड की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी
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भोपाल गैस पीड़ितों को मुआवजे के रूप में मिल चुकी 25 हजार रुपए की राशि कम आंकी गई है। सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई सुधार याचिका का उद्देश्य ही यह है कि मुआवजा राशि को नए सिरे से तय किया जाए। इन याचिकाओं में गैस पीड़ित संगठन भी याचिकाकर्ता है। भोपाल ग्रुप फॉर इनफार्मेशन एन्ड एक्शन की रचना ढिंगरा ने कहा कि मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार मौतों के वास्तविक आंकड़ों को पेश नहीं कर रही है। 2009 में सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि मौत का सही आकड़ा 23 हजार से ज्यादा है। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट में सुधार याचिका में मनगढ़त 5 हजार आकड़े क्यों दे रही है। उन्होंने कहा कि इसे सुधारने की पहल क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गैस की वजह से 93% पीड़ितों के सेहत को पहुंचे नुकसान को अस्थाई बता रही है। वैज्ञानिक रिपोर्ट और और गैस लगने की वजह से बहुसंख्यक पीड़ितों के स्वास्थ्य को अस्थाई नहीं बल्कि स्थाई नुकसान पहुंचा है। ढिंगरा ने कहा कि इन आकड़ों से मुआवजे के कई पात्र हकधार वंचित हो जाएंगे।
गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि पिछले कुछ सालों में कम से कम चार मौकों पर राज्य और केंद्र सरकारों के मंत्रियों और अधिकारियों ने यह माना है कि सुधार याचिका में गैस हादसे की वजह से पहुंचे नुकसान के आंकड़े गलत थे और आंकड़ों को सुधारने के लिए वादे भी किए थे।
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्षा रशीदा बी ने कहा कि हम संगठन भी इस मामले में राज्य और केंद्र सरकारों के साथ याचिकाकर्ता है | हम अतिरिक्त मुआवजे के रूप में 646 अरब रूपए मांग रहे हैं जबकि सरकारें मात्र 96 अरब रूपए मांग रही हैं | अब वक्त आ गया है कि अपने कानूनी अधिकारों पर हो रहे इस हमले के खिलाफ भोपाल के गैस पीड़ित फिर से सक्रिय हो जाए।