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MP New: IAS के बेटियों को दूध पिलाने के बयान पर बवाल, उमा भारती ने कहा- बयान मातृशक्ति विरोधी

Fri, 04 Nov 2022 11:36 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती महिला एवं बाल विकास विभाग के एसीएस अशोक शाह के बयान पर भड़क गईं। शाह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में कहा था कि हमारी बालिकाओं के पीछे रहने का कारण मां का दूध नहीं पिलाना है।
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पूर्व सीएम उमा भारती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव अशोक शाह के दिए बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने अधिकारी के बयान को लेकर अपनी बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने रखी है। दरअसल, लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के शुभारंभ पर महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव अशोक शाह ने कहा कि 2005 में 15% माताएं बेटियों को दूध पिलाती थी, अब 42% माताएं अपनी बेटियों को दूध पिलाती है। इस बयान को उमा भारती ने मातृशक्ति की छवि खराब करने वाला बताया है।
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रवींद्र भवन में बुधवार को लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में प्रमुख सचिव अशोक शाह ने कहा था कि 2007 में मुख्यमंत्री ने सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया। आज लाड़ली लक्ष्मी के रूप में सामाजिक क्रांति शुरू चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी बालिकाएं पीछे क्यों रह जाती है? इसका कारण बालिकाओं को मां का दूध नहीं पिलाया जाना है। 2005 में प्रदेश में सिर्फ 15 प्रतिशत माताएं अपनी बेटियों को अपना दूध पिलाती थी। आज 42 प्रतिशत माताएं अपनी बेटियों को दूध पिलाती है।  
 
प्रमुख सचिव के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी योजना 2.0 के क्रियान्वयन शुरू होने का स्वागत् है। मध्य प्रदेश सरकार के इस कार्यक्रम में भाषण देते हुए प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी का बेहद असंगत एवं हास्यास्पद कथन देखा। हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी महिलाओं के सम्मान के लिए बहुत सजग एवं संवेदनशील हैं। जब मैंने आज फोन पर बात करके उनको यह बात बताई तो वह इस कथन से असहमत एवं आश्चर्यचकित थे। मुख्यमंत्री की बात से लगा कि समारोह में बहुत शोर के कारण वह इस बात को सुन नहीं पाए। मुझे लगता है कि वह इस कथन को ठीक करने का रास्ता स्वयं निकाल लेंगे।
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पूर्व सीएम बोली कि अधिकारी ने कहा है कि "हमारी योजना के कारण अब 42% महिलाएँ अपनी बेटियों को दूध पिलाती हैं जबकि 2005 से पहले वह 15% था।" उमा ने कहा कि अगर यह कथन सही छपा है तो यह बेटी विरोधी, माता विरोधी एवं मध्यप्रदेश की मातृशक्ति की छवि खराब करने वाला है। अधिकारियों को अपने बयान के प्रति सचेत एवं जिम्मेदार रहना चाहिए। अमीर हो या गरीब, बेटा हो या बेटी, बच्चे के जन्मते ही हर मां अपने बच्चे को दूध पिलाती ही है। लाखों में एक केस में कई कारणों से ऐसा नहीं होता होगा। आखिर सारी महिलाएं बेटियां ही हैं, वो जिंदा कैसे रह गई।

उधर, कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने भी बयान पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि सीएम की मौजूदगी में आपके विभाग के प्रमुख अधिकारी महिलाओं के लिए इतना शर्मनाक बयान कैसे दे रहे हैं। यह जानने का विभाग के पास कौन-सा पैमाना है कि कौन-सी मां बच्ची की स्तनपान कराती है और कौन-सी नहीं? 
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