शिक्षा केवल एक इंसान के ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के विकास में योगदान देती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर ही एक राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है। केंद्र व राज्य की सरकार के द्वारा भी शिक्षा पर विशेष फोकस किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर मध्यप्रदेश के उर्जाधानी सिंगरौली जिले के एक गांव की तस्वीर आपको हैरान कर देगी। जहां ग्राम पंचायत के सचिव की लापरवाही से छात्र शिक्षा से वंचित रह गया, उसका किसी भी स्कूल में एडमिशन नहीं हो रहा है।
दरअसल, जिले के देवसर जनपद के ग्राम पंचायत जोबगड़ में सचिव ने एक जिंदा युवक को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया। समग्र पोर्टल पर भी सचिव ने मृत घोषित कर दिया, जिस वजह से छात्र का अब किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं हो रहा है। खुद को जिंदा साबित करने के लिए छात्र व उसके परिजन बीते एक साल से कलेक्ट्रेट का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी सरकारी कागजों में छात्र जिंदा नहीं हो पाया। पंचायत सचिव की एक बड़ी लापरवाही ने छात्र के भविष्य के साथ जमकर खिलवाड़ किया है। छात्र और उसके परिजन पिछले एक वर्ष से स्कूल में दाखिला पाने के लिए भटक रहे हैं। लेकिन स्कूल वाले यह कह देते हैं कि छात्र को मृत दिखा दिया गया है, जबकि छात्र खुद जीवित है और अपने शिक्षा के लिए एडमिशन पाने के लिए दर-दर भटक रहा है, जिसके लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहा है। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि जयंतीलाल विश्वकर्मा पिता अरुण विश्वकर्मा ग्राम खेखड़ा का निवासी है। ग्राम पंचायत सचिव ने जयंतीलाल को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया। सरकारी कागजों में सचिव ने जयंतीलाल को 11 नवम्बर 2022 में मृत घोषित कर दिया है। समग्र पोर्टल पर जिंदा छात्र मर चुका है। अब खुद को जिंदा साबित करने के लिए जयंतीलाल कलेक्ट्रेट का चक्कर लगा रहा है, ताकि उसका वह पढ़ सके। वहीं, अब इस मामले में सिंगरौली जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह नागेश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।