मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी, सहायिका को सम्मानित किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि अब आंगनवाड़ी सिर्फ आंगनवाड़ी नहीं होगी. अब प्री स्कूलिंग वहीं होगी। सीएम ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मेरे लिए विभाग नहीं परिवार है। हमारी आंगनवाड़ी का अमला बहुत मेहनत करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रमाणपत्र मैंने आपके हाथ में नहीं दिया बल्कि प्रदेश की जनता की ओर से आपका सम्मान किया है। विभाग का उद्देश्य सभल हो जाए यही जीवन की सार्थकता है।
सीएम ने कहा कि मैं 18 घंटे काम करता हूं। अभी भी गला खराब है। प्रदेश की साढ़े 8 करोड़ जनता का काम करना है। इसलिए काम करते रहता हूं। उन्होंने कहा कि हमें प्रदेश में पूरी तरह कुपोषण दूर करना है। सीएम ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग 75 प्रतिशत आबादी की सेवा करने वाला विभाग है।
सीएम ने कहा कि कुपोषण मुझे प्रदेश के माथे पर कलंक सा लगता है। बच्चे कुपोषित ना रहें यह हमें करना है। यह सही है कि बाकी कई राज्यों से हम पीछे हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम ठान लें तो कुछ असंभव नहीं है। सीएम ने कहा कि मुझे मांगने में कोई शर्म नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमने अडॉप्ट आंगनवाड़ी अभियान समाज को जोड़ने के लिए शुरू किया। इंदौर में एक दिन में ठेले लेकर निकाला था तो बिना मांगे साढ़े 8 लाख रुपये से अधिक के चेक मिल गए। हमें यह सोचना है कि हम अपनी आंगनवाड़ी को कैसे एक आदर्श आंगनवाड़ी बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि संकल्प लें कि कोई बच्चा एक साल में अंडरवेट नहीं रहेगा।
सीएम ने कहा कि मेरी एक जिद है कि मैं प्रदेश में लिंगानुपात को बराबर करुंगा। सीएम ने कहा कि आज विभाग कन्या पूजन करना भूल गया। उन्होंने कहा कि 2011-12 में एक हजार बेटों पर 912 बेटियों का जन्म होता था। आज यह आकड़ा 956 बेटियां पहुंच गया है। हमें 1 हजार बेटों के जन्म पर 1 हजार बेटियों का जन्म हो करना है। उन्होंने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना से प्रदेश में चमत्कार हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री बोले कि मेरी जिंदगी का मकसद मां, बेटी और बहन को उनका अधिकार दिलाना है। उन्होंने अधिकारियों ऐसा सिस्टम बनाने को कहा, जिसमें सुझाव आएं। उन्होंने कहा कि पोषण आहार खाना पाप खाना है। इससे बड़ा कोई अपराध नहीं है। सीएम ने कहा कि राज्यस्तरीय पुरस्कार हर साल दिए जाएंगे। उनहेंने जिले में प्रथम, द्वितीय और तृतीय आंगनवाड़ी को पुरुस्कार देने की पहल करने की बात भी कही।