धार में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए महिला-पुरुषों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
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18 गांवों के लिए खतरा
बांध के निचले इलाके में बसे धार के 12 और खरगोन के 6 गांव को खतरा है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने देररात तक गांवों को खाली करवाया। यहां से ग्रामीणों को अन्य गांव में सुरक्षित स्थान पर भेजा गया हैं। उनके खाने-पीने के इंतजाम किए गए हैं। मंत्री सिलावट ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कारम बांध के संबंध में लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। यहां आपदा प्रबंधन के लिए सेना की इकाई भी पहुंच चुकी हैं और राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा प्रबंधन दल भी काम प्रारंभ कर चुका है। कारम बांध साइट के लिए पांच कॉलम आर्मी पहुंच गई है। इनमें एक कॉलम इंजीनियरिंग का है। प्रत्येक कॉलम में लगभग 40 जवान हैं। वहीं, एनडीआरएफ की तीन अतिरिक्त टीमें- भोपाल, वड़ोदरा और सूरत से एक-एक टीमें राहत एवं बचाव सामग्री के साथ धामनोद के लिए रवाना हो गई है। एयरफोर्स के दो हेलिकॉप्टर अभी स्टैंडबाय पर हैं।
100 करोड़ रुपये की लागत
धार जिले की धर्मपुरी तहसील के ग्राम कोठीदा भारुडपुरा में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे निर्माणाधीन बांध में पहली ही बारिश में गुरुवार को रिसाव शुरू हो गया है। कारम मध्यम सिंचाई परियोजना के बांध के दाएं हिस्से में 500-530 के मध्य डाउन स्ट्रीम की मिट्टी फिसलने से बांध को खतरा पैदा हुआ था। इस बांध की लंबाई 590 मीटर और ऊंचाई 52 मीटर है। वर्तमान में इसमें 15 एमसीएम पानी इस बांध में जमा है। लीकेज की खबर मिलते ही इंदौर के आईजी और कमिश्नर तथा धार व खरगोन के कलेक्टर और एसपी घटनास्थल पर पहुंचे। आगरा-मुंबई नेशनल राजमार्ग को डायवर्ट कर दिया गया भोपाल और इंदौर के विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद है। बांध का पानी खाली कर बांध की दीवार में राहत-बचाव का कार्य किया जा रहा है।