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MP News: 90 साल बाद फिर होगी ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप की खुदाई, प्राचीन रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना

Thu, 13 Aug 2026 02:34 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन की 2200 वर्ष पुरानी वैश्य टेकरी स्थित बौद्ध स्तूप की 90 साल बाद फिर खुदाई होगी। एएसआई आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन की तैयारी कर रहा है। यह स्तूप सांची से भी बड़ा बताया गया है। खुदाई में मौर्यकालीन अवशेष, प्राचीन लिपि और स्थापत्य से जुड़े साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।
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उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप - फोटो : अमर उजाला
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित 2200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप की खुदाई 90 वर्ष बाद फिर शुरू करने जा रहा है। एएसआई के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वैश्य टेकरी पर स्थित यह विशाल स्तूप आकार में रायसेन जिले में स्थित प्रसिद्ध सांची के स्तूप से भी बड़ा है।

पुरातत्व विभाग के अभिलेख दर्शाते हैं कि इस ऐतिहासिक स्थल पर पहली बार वर्ष 1936 में तत्कालीन ग्वालियर रियासत के पुरातत्व विभाग ने प्रारंभिक खुदाई कराई थी। इसके बाद से यहां कोई नया उत्खनन कार्य नहीं हो सका। एएसआई के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की सहायता से इस स्थल की दोबारा खुदाई की योजना तैयार की गई है। इस बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया से क्षेत्र के छिपे हुए प्राचीन ऐतिहासिक रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना जताई जा रही है।

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उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप - फोटो : अमर उजाला
सांची स्तूप से भी बड़ा आकार
एएसआई के सर्वेक्षण दस्तावेजों के अनुसार वैश्य टेकरी का यह टीला एक अत्यंत विशाल क्षेत्र में विस्तृत है। शोधकर्ताओं के अनुसार निर्माण के समय यह बौद्ध स्तूप सांची के मुख्य स्तूप से आकार में काफी बड़ा था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार मौर्य सम्राट अशोक की पत्नी देवी का संबंध उज्जैन से था, जिससे इस स्थान का ऐतिहासिक तथा धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

 
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उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप - फोटो : अमर उजाला
पुरातत्ववेत्ताओं का कहना है कि आगामी खुदाई के दौरान मौर्यकालीन अवशेष, प्राचीन लिपि और उस काल की स्थापत्य कला से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं। एएसआई ने इस परियोजना के लिए जरूरी सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया है। विभाग जल्द ही धरातलीय स्तर पर उत्खनन कार्य शुरू करने की तैयारी में जुटा है ताकि 2200 वर्ष पुराने इतिहास और रहस्यों को प्रामाणिक साक्ष्यों के साथ देश के सामने प्रस्तुत किया जा सके।
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