मध्यप्रदेश सरकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत राज्य सरकार गरीब बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराती है। इसे लेकर कांग्रेस नेता और प्रदेश के सहकारिता, संसदीय मामले और सामान्य प्रशासन मंत्री गोबिंद सिंह का कहना है कि इस योजना को खत्म कर देना चाहिए क्योंकि तीर्थयात्रा का आयोजन करना सरकार का काम नहीं है।
सिंह ने कहा, 'तीर्थयात्रा का आयोजन करना सरकार का काम नहीं है। हालांकि सरकार ने इसपर अभी कोई फैसला नहीं लिया है लेकिन यह मेरी निजी राय है। भक्तों को सुविधाएं देना, उनकी मदद करना ठीक है लेकिन सरकारी धन पर तीर्थयात्राओं का आयोजन मेरे अनुसार सही नहीं है। तीर्थयात्रा लोगों द्वारा स्वयं अर्जित धन पर की जानी चाहिए।'
राज्य के मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब सरकार ने 15 फरवरी को वैष्णो देवी, काशी, द्वारका और रामेश्वरम में प्रस्तावित धार्मिक यात्रा से कुछ दिन पहले कम से कम 4000 वृद्धों के लिए पांच राज्य की प्रायोजित तीर्थयात्रियों को रद्द कर दिया है। सिंह का कहना है कि इस फंड का राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा नेता और विधायक विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता के इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस मामले पर अपनी पार्टी और सरकार का रुख साफ करने के लिए कहा है।
सारंग ने कहा, 'यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बयान है। एक तरफ कांग्रेस सरकार आईफा अवॉर्ड्स आयोजित करने के बड़े-बड़े दावे करती है और उसके मंत्री कहते हैं कि धार्मिक यात्राओं को बंद कर देना चाहिए। भाजपा सरकार ने गरीब लोगों को देश में तीर्थ स्थलों की यात्रा कराने के लिए यह योजना शुरू की थी।'
भाजपा विधायक ने आगे कहा, 'सबसे बेकार बात यह है कि उन्होंने लोगों की भावनाओं का मजाक बनाया है। कमलनाथ को आगे आकर स्पष्ट करना चाहिए कि यह मंत्री की निजी राय है या ये सरकार या कांग्रेस पार्टी का बयान है।'