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MP: ओंकारेश्वर में प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर वसूली, 11 श्रद्धालुओं से 13,200 रुपये लेने का आरोप

Tue, 07 Jul 2026 06:41 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर राजस्थान के 11 श्रद्धालुओं से 13,200 रुपये वसूलने का आरोप लगा है। मामले में आरक्षक को लाइन अटैच किया गया, जबकि सुरक्षा गार्ड और फोटोग्राफर पर कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी गई।
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गए हैं। राजस्थान से आए 11 श्रद्धालुओं से वीआईपी/प्रोटोकॉल दर्शन कराने के नाम पर 13,200 रुपये वसूलने की शिकायत दर्शन प्रभारी एवं डिप्टी कलेक्टर मुकेश काशिव से की गई है।

शिकायत के अनुसार, मंदिर परिसर में तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने प्रोटोकॉल लिंक उपलब्ध कराने के लिए पुलिस आरक्षक से संपर्क किया। आरोप है कि एक ही आधार कार्ड पर दो बार प्रोटोकॉल लिंक जारी किए गए। इनमें से कुछ श्रद्धालुओं को प्रोटोकॉल के माध्यम से दर्शन कराए गए, जबकि अन्य को बिना वैध प्रोटोकॉल के मंदिर में प्रवेश दिलाया गया।

प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?

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मामले की जानकारी जिला प्रशासन और पुलिस तक पहुंचने के बाद पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने प्रथम दृष्टया कार्रवाई करते हुए मांधाता थाने में प्रोटोकॉल व्यवस्था देख रहे आरक्षक धर्मेंद्र गुर्जर को लाइन अटैच कर विभागीय जांच के आदेश दिए। इसके बाद मंदिर परिसर में कार्यरत सुरक्षा गार्ड संजय मोरे और फोटोग्राफर सचिन अग्रवाल के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया है।

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सूत्रों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने और मामला सार्वजनिक होने के बाद प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। अब जांच की जा रही है कि प्रोटोकॉल लिंक किस प्रक्रिया के तहत जारी किया गया, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और श्रद्धालुओं से वसूली गई राशि किसके माध्यम से ली गई।

यह घटना एक बार फिर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की प्रोटोकॉल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि प्रोटोकॉल व्यवस्था का दुरुपयोग कर अवैध वसूली की जाती है, तो इससे न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित होता है, बल्कि मंदिर प्रशासन और शासन की व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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