देहात और पिछड़े शहरी इलाकों में लोगों को लचर स्वास्थ्य सेवाओं से अक्सर जूझना पड़ता है, पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण कई बार अपनों की जान से भी हाथ धोना पड़ जाता है, लेकिन यह दर्द जब एक आईएएस और जिले के कलेक्टर ने महसूस किया तो उनकी वेदनाएं आंसुओं के साथ बाहर आ गई।
जुबां से यही निकला, कि 'खराब सिस्टम ने मेरी मां की जान ले ली'। हालांकि एक जिम्मेदार अधिकारी की तरह उन्होंने यह भी माना कि 'इसके लिए मैं भी जिम्मेदार हूं'। मामला है मध्यप्रदेश के दमोह जिले का। जहां कलेक्टर श्रीनिवास शर्मा की 75 वर्षीय मां की जान लचर स्वास्थ्य सुविधाओं की बलि चढ़ गई। बीमार हुई तो घंटों तक एंबुलेंस नहीं मिल सकी, जैसे तैसे एंबुलेंस मिलीं तो मां साथ छोड़कर जा चुकी थी।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार दमोह जिले के कलेक्टर श्रीनिवास शर्मा की माताजी पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थी। बताया जाता है उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। शनिवार को उनकी तबियत बिगड़ी तो दमोह में पर्याप्त इलाज न होने के कारण उन्हें जबलपुर ले जाया जाना था।
इसके लिए जिले के सरकारी अस्पताल की एंबुलेंस से संपर्क किया गया, लेकिन उसमें वेंटीलेटर की सुविधा नहीं थी। यूं तो अस्पताल के पास दो एंबुलेंस हैं लेकिन उनमें से एक लंबे समय से खराब पड़ी थी तो दूसरी 250 किलोमीटर दूर भोपाल गई हुई थी।