प्रदेश में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे अथवा अतिक्रमण की किसी भी शिकायत पर जिला प्रशासन को तुरंत सख्त कदम उठाने होंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को स्पष्ट हिदायत दी है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शासकीय जमीन पर कब्जे से जुड़ी कोई भी शिकायत प्राप्त होने पर उसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज न किया जाए।
उन्होंने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टरों के साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों और विभिन्न भू-अर्जन प्रकरणों की गहन समीक्षा की। इस दौरान मुख्य सचिव ने 100 दिन से अधिक समय से लंबित पड़ी शिकायतों के निराकरण में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मैदानी स्तर पर तैनात अधिकारियों को लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण के प्रति पूरी गंभीरता दिखाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
लंबी पेंडेंसी पर मुख्य सचिव का कड़ा रुख
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि निचले स्तर पर कार्यरत एल-1 अधिकारियों को प्रत्येक शिकायत का सूक्ष्मता से परीक्षण करना होगा और उसका समुचित समाधान प्रस्तुत करते हुए ही जवाब दर्ज करना होगा। यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस समाधान या जवाब के शिकायत को सीधे एल-2 स्तर पर अग्रेषित करता है, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि वे लंबित शिकायतों का स्वयं नियमित रूप से निरीक्षण करें और समस्या का सही समाधान खोजने के लिए शिकायतकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करें। यदि परीक्षण के बाद कोई शिकायत नियम अनुसार बंद करने योग्य पाई जाती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर फोर्स क्लोज करने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
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शिकायतों के विश्लेषण और समाधान के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को आगामी एक माह की अवधि में अपने-अपने जिलों में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के अंतर्गत दर्ज शिकायतों का विस्तृत विश्लेषण करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को यह आकलन करना होगा कि उनके क्षेत्र में किन विशिष्ट विषयों और किन विशिष्ट अंचलों से सबसे अधिक संख्या में शिकायतें आ रही हैं। जिन क्षेत्रों और विषयों में शिकायतों का आंकड़ा अधिक पाया जाए, वहां विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए समस्याओं के स्थायी निराकरण के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी आवेदकों की समस्याओं का त्वरित समाधान निकालने के बजाय उन्हें बेवजह दफ्तरों के चक्कर न कटवाएं। इसके साथ ही शिकायतों को अपने कार्यक्षेत्र से बाहर का बताकर उच्च स्तर या अन्य विभागों में स्थानांतरित करने की प्रवृत्ति पर भी तुरंत रोक लगाई जाए।
सबसे अधिक लंबित मामलों वाले प्रमुख विभाग
मुख्य सचिव ने समीक्षा के दौरान उन प्रमुख विभागों को चिह्नित किया जहां मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें सबसे अधिक समय से लंबित चल रही हैं। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग तथा जनजातीय कार्य विभाग से संबंधित शिकायतों की संख्या सर्वाधिक है। मुख्य सचिव ने इन सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे इन विभागों की लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।
भू-अर्जन और विकास परियोजनाओं में तेजी
बैठक में भू-अर्जन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भू-अर्जन की प्रक्रिया में निर्धारित समय सीमा का हर हाल में कड़ाई से पालन किया जाए। राज्य की बड़ी विकास परियोजनाओं से जुड़े भू-अर्जन प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनका जल्द से जल्द निपटारा किया जाए ताकि विकास कार्य बाधित न हों। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में संचालित किए जा रहे मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत नल-जल परियोजनाओं को समय पर हस्तांतरित करने समेत अन्य सभी आवश्यक प्रशासनिक कार्यों को नियत समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।