सामान बुक करके डिलीवरी करने में मनमानी करने वाली कुरियर कंपनियों के लिए ये आदेश एक सबक हो सकता है, जहां एक छात्रा का फार्म बुक करने के बाद भी कंपनी ने 20 दिन बाद यह कहकर लौटा दिया कि फलां जगह कंपनी का ऑफिस ही नहीं है इसलिए पार्सल डिलीवर नहीं हो सकता। उपभोक्ता फोरम ने इसे कुरियर कंपनी की मनमानी मानते हुए 33 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे छात्रा को भुगतान किया जाएगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार मामला जुड़ा है फर्स्ट फ्लाइट कंपनी से, जिसकी एक लापरवाही ने एक छात्रा के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एडमिशन के सपनों को तोड़ दिया। भोपाल की रहने वाली 20 वर्षीय सौम्या चौकसे ने साल 2013 में क्लेट एग्जामिनेशन के लिए ऑनलाइन फार्म भरा था।
इसके बाद छात्रा ने फार्म की एक कॉपी अपने भाई को हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी रायपुर के नाम से कुरियर करने के लिए कहा। उसके भाई ने फर्स्ट फ्लाइट कंपनी के द्वारा फार्म उक्त यूनिवर्सिटी के लिए कुरियर कर दिया।
लॉ यूनिवर्सिटी की तैयारी कर रही छात्रा का फार्म कर दिया था वापस
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छात्रा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की इस परीक्षा के लिए सालभर से कोचिंग के द्वारा तैयारी कर रही थी। लेकिन वह तब हैरत में पड़ गई जब कुछ दिन बाद कुरियर कंपनी ने उसका फार्म यह कहकर लौटा दिया कि उस जगह पर हमारी कोई सर्विस नहीं है इसलिए आपका फार्म लौटाया जाता है।
छात्रा को कंपनी की इस लापरवाही से बड़ा धक्का लगा। उसने मामले की शिकायत भोपाल स्थित उपभोक्ता फोरम में की। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि ने सफाई दी कि जब उसका भाई पार्सल पोस्ट करने के लिए आया था हमने उसे तब ही बता दिया था कि कंपनी की उस स्टेशन पर कोई सर्विस नहीं है।
हालांकि हमने फिर भी उसके कहने पर पार्सल स्वीकार कर लिया। वहीं सौम्या ने पार्सल पर ठीक से पता भी नहीं डाला था न ही हमें उसकी पोस्ट भेजने की जल्दी का अंदाजा था। प्रतिनिधि का तर्क था कि इस तरह के डाक्यूमेंट्स साधारण पोस्ट से भी भेजे जा सकते थे लेकिन छात्रा ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया।
फोरम का आदेश, फार्म स्वीकार करने के बाद पहुंचाने की जिम्मेदारी कंपनी की
सुनवाई के दौरान फोरम ने माना कि छात्रा ने संबंधित नियमों के अनुसार फार्म भेजने में गलती की लेकिन ये जिम्मेदारी कुरियर कंपनी की थी कि जब उसने एक बार पार्सल स्वीकार कर लिया फिर उसे किसी भी कीमत पर उसे निर्धारित जगह पर पहुंचाना चाहिए था।
यह छात्रा के भविष्य का सवाल था और इसके कारण उसका साल और वो पैसा बर्बाद हुआ जो उसने सालभर कोचिंग करने में लगाया था। सुनवाई करने वाली बेंच के न्यायाधीश प्रणेश कुमार प्राण, विशेषज्ञ सुनील श्रीवास्तव और मोनिका मलिक ने कंपनी पर लापरवाही के लिए 30 हजार का जुर्माना लगाते एक माह में हुए छात्रा को देने का निर्देश दिया।
इसके अलावा कानूनी पैरवी में खर्च हुए 3 हजार रुपये का भुगतान भी कंपनी को छात्रा को करना होगा।