मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री (SE) शिवराम सेमिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई इंदौर, पीथमपुर, धार और मुरैना में एक साथ की गई।
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच के मुताबिक शिवराम सेमिल ने अपने पूरे सेवाकाल में करीब 2 करोड़ रुपये का वेतन प्राप्त किया, जबकि उनके और उनके परिजनों के नाम पर करीब 7.16 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति मिली है। यह उनकी वैध आय से लगभग 258 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।
छापेमारी के दौरान लोकायुक्त टीम ने संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी, निवेश से संबंधित रिकॉर्ड और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि अधिकारी के बेटे, बहू और दामाद के नाम पर पीथमपुर और धार में ट्रांसफार्मर निर्माण की फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। इनके वित्तीय स्रोतों और निवेश की भी जांच की जा रही है।
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लोकायुक्त को इंदौर की ओमेक्स सिटी में कई प्लॉट से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इसके अलावा इंदौर की सिलिकॉन सिटी में स्थित करीब 1.20 करोड़ रुपये कीमत का तीन मंजिला आलीशान मकान भी जांच के दायरे में आया है। मुरैना में दो मंजिला मकान और जमीन के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
इतना ही नहीं, अधिकारी के पास करीब 15 लाख रुपये कीमत की इलेक्ट्रिक कार सहित कई लग्जरी वाहन होने की जानकारी भी सामने आई है। लोकायुक्त अब इन सभी संपत्तियों और वाहनों की खरीद में इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत की पड़ताल कर रही है।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच के आधार पर अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अब उनके बैंक खातों, निवेश, वित्तीय लेन-देन और अन्य संपत्तियों की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में बेनामी संपत्तियां या अन्य वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं, तो उनके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।