मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधायकों से आमने-सामने मुलाकात में सर्वे रिपोर्ट पेश करने से हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट में 73 विधायकों के कामकाज को नकारात्मक सूची में रखा गया है। इसमें 16 मंत्री भी शामिल हैं।
वहीं, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद छपे विज्ञापनों से साफ नजर आता है कि पार्टी प्रदेश में दो ध्रुवों में बंटी है।
नवंबर में संभावित विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पहल पर प्रदेशाध्यक्ष बने नरेंद्र सिंह तोमर की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।
अभी मुख्यमंत्री विधायकों से संभागवार बात कर रहे हैं, साथ ही विधायकों से यह भी पूछा जा रहा है कि वे अपने क्षेत्र के काम बताएं। इस प्रक्रिया में जहां कई लोगों के क्षेत्र बदले जा सकते हैं, वहीं कई लोगों के टिकट भी काटे जा सकते हैं।
ये दोनों ही कदम उलटे पड़ने का खतरा भी बरकरार है। वैसी स्थिति में पार्टी के लिए अपने ही बागियों से निपटना ज्यादा कठिन साबित हो सकता है।
प्रदेश में 230 सीटों की विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 152 है। इनमें से कई सीटें सत्ताधारी पार्टी के लिए खतरे की घंटी हैं।
मुख्यमंत्री चौहान और प्रदेशाध्यक्ष दोनों की चुनौती यह है कि सत्ताविरोधी रुझान और क्षेत्रों में विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी का कोई हल ढूंढा जाए।