शुक्रवार को मंदसौर की सड़कों पर सिर्फ आवाजें नहीं थीं, बल्कि था आक्रोश, पीड़ा और इंसाफ की पुकार। बिटिया हम शर्मिंदा हैं, तेरे दोषी जिंदा हैं, बिटिया के सम्मान में, हम सब हैं मैदान में जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा। मौका था उस मासूम बच्ची के इंसाफ की लड़ाई का, जिसके साथ 2018 में हुई दरिंदगी के दो दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया है।
इस निर्णय के खिलाफ सर्व समाज, राजनीतिक दलों, महिलाओं, पुरुषों, और हर वर्ग के नागरिकों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। यह कोई राजनीतिक या धार्मिक आंदोलन नहीं था। यह एक न्याय की पुकार थी, जिसमें इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म बनकर सामने आई। गुरुवार को सर्व समाज की बैठक में निर्णय लिया गया कि आरोपियों इरफान और आसिफ को फांसी के बजाय आजीवन कारावास देना, न्याय नहीं बल्कि अन्याय है। शुक्रवार को सुबह 10 बजे गांधी चौराहा स्थित विश्वपति शिवालय पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। यहां से एक मौन रैली के रूप में जुलूस निकाला गया, जो पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचा, जहां सर्व समाज ने मिलकर ज्ञापन सौंपा और मांग की कि दरिंदों को फांसी दी जाए।
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सिर्फ एक आव्हान... और पूरा शहर थम गया
इस प्रदर्शन की एक खास बात यह रही कि बंद का एक आव्हान हुआ, सोशल मीडिया के जरिए संदेश फैलाया गया। पूरा शहर समर्थन में बंद रहा। इस दौरान घंटाघर, बस स्टैंड, सदर बाजार सहित अधिकांश प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र बंद रहे। व्यापारियों ने दुकानें बंद रख रैली में भागीदारी की इसके साथ ही आमजन, महिलाएं, विद्यार्थी और सामाजिक संगठन भारी संख्या में शामिल हुए।
यह था मामला
26 जून 2018 को नगर के एक निजी विद्यालय से सात वर्षीय बच्ची जब घर लौट रही थी तब आसिफ और इरफान नाम के दो दरिंदे उसे बहला फुसला कर अपने साथ झाड़ियों में ले गए और उस मासूम बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर उसे झाड़ियां में ही छोड़ दिया। 24 घंटे बाद बेहद नाजुक हालत में वह बच्ची मिली। उसके बाद के जो घटनाक्रम हुए नगर, अंचल और पूरे देश में अपराधियों को फांसी देने की मांग की गई। पॉक्सो एक्ट में यह मामला चला और 55 दिनों में दोनों दरिंदों को फांसी की सजा सुना दी गई। किंतु हाल ही में 30 जून को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से सेशन कोर्ट ने उनकी फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील किया है। इससे नगर की जनता में आक्रोश फैल गया और दोषियों को फिर से फांसी की सजा दिए जाने की मांग को लेकर नगर बंद कर विरोध दर्ज करवाया गया।
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मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
दोपहर तीन बजे सर्व समाज के लोग मौन रैली के रूप में पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे यहां मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर सेशन आरोपियों की फांसी की सजा यथावत रखने की मांग की।
मासूम को इंसाफ दिलाने बंद रहा नगर