मंदसौर में कोर्ट ने जघन्य अपराध करने वाली मां को चार बार उम्रकैद की सजा सुनाई।
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मंदसौर जिले में चार मासूम बच्चों को कुएं में धकेलकर हत्या करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश गरोठ निरंजन कुमार पांचाल की अदालत ने दोषी मां सुगनाबाई को चार अलग-अलग मामलों में चार बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर हर मामले में 2,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह खौफनाक वारदात गरोठ तहसील के ग्राम पीपलखेड़ा में दो वर्ष पहले हुई थी, जहां महिला ने अपने ही बच्चों की जान ले ली थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने महिला को चारों बच्चों की हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने प्रत्येक बच्चे की मृत्यु के लिए अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मृत बच्चों में नौ साल का बंटी, सात साल की अनुष्का, चार साल की मुस्कान और दो साल का कार्तिक शामिल थे। घटना की सूचना मिलते ही गरोठ थाना पुलिस मौके पर पहुंची थी और मामले की जांच शुरू की थी। पुलिस ने आरोपी सुगनाबाई के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज करके न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था।
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प्रताड़ना से तंग आकर उठाया कदम
पुलिस जांच में सामने आया कि चालीस वर्ष की सुगनाबाई का विवाह लगभग सत्रह वर्ष पूर्व हुआ था। उसका पति रोड सिंह शराब पीकर आए-दिन उसके और बच्चों के साथ मारपीट करता था। वारदात से एक रात पहले भी तेज बारिश के दौरान पति ने महिला तथा बच्चों के साथ मारपीट की और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था। महिला के काफी मिन्नतें करने पर भी पति नहीं माना। उसे चारों बच्चों को साथ लेकर रात में ही आंगनबाड़ी केंद्र जाना पड़ा और वहीं रात बिताई। लगातार घरेलू कलह और प्रताड़ना से परेशान होकर उसने अगले दिन 14 जुलाई 2024 की सुबह यह घातक फैसला लिया।
भाई को फोन कर दी थी जानकारी
इस खौफनाक कदम को उठाने से ठीक पहले महिला ने अपने भाई को फोन करके बताया था कि वे सब मरने जा रहे हैं। इसके बाद वह चारों बच्चों को खेत पर स्थित कुएं के पास ले गई। उसने एक-एक करके चारों मासूमों को कुएं में धकेल दिया और फिर स्वयं भी छलांग लगा दी। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने किसी तरह महिला को कुएं से बाहर निकालकर बचा लिया, लेकिन चारों बच्चों को नहीं बचाया जा सका। पुलिस ने पति रोड सिंह के खिलाफ भी घरेलू हिंसा और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था, जिसकी अदालती सुनवाई वर्तमान में पृथक रूप से चल रही है।