मंडला जिले में मॉब लिंचिंग जैसी क्रूर घटना सामने आई है। बच्चा चोरी की अफवाह के चलते ग्रामीणों की भीड़ ने एक अज्ञात बालक को पकड़कर बेरहमी से पीट दिया। गंभीर रूप से घायल बालक की अगले दिन मौत हो गई। वहीं, बीते दिन छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ‘बच्चा चोरी’ की झूठी अफवाह ने एक निर्दोष महिला को भीड़ की हिंसा का शिकार बना दिया।
बता दें घटना मंडला के बरखेड़ा गांव की है, जो बिछिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें बालक को भीड़ से घिरा हुआ और मारपीट का शिकार होते देखा जा सकता है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस ने छुड़ाया, अस्पताल में कराया भर्ती
गांव के सरपंच की सूचना पर बिछिया पुलिस मौके पर पहुंची और बालक को भीड़ से छुड़ाकर अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बालक मानसिक रूप से कमजोर प्रतीत हो रहा था और उसकी पहचान नहीं हो सकी थी।
इलाज के दौरान लापता, फिर सड़क हादसे में मौत
वीडियो के आधार पर कार्रवाई
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस मारपीट में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसपी ने स्पष्ट कहा है कि भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति की पिटाई करना गंभीर अपराध है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और किसी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें। कानून अपने हाथ में लेना दंडनीय अपराध है। यह घटना एक बार फिर समाज में फैल रही अफवाहों और भीड़तंत्र की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मासूम की मौत के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।
छतरपुर में पन्ना रोड पर हुई बच्चा चोरी को लेकर मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश है। जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला बमीठा थाना क्षेत्र के ग्राम गंज की रहने वाली है और ईसाई समुदाय से जुड़ी है। वह जंगलों से बेल-पत्ती बीनकर बागेश्वर धाम में बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला रोज की तरह बेल-पत्ती बेचने आई थी, तभी कुछ लोगों ने उस पर बच्चा चोरी का शक जताया। देखते ही देखते अफवाह फैल गई और भीड़ ने बिना सच्चाई जाने उसे घेर लिया। वीडियो में कुछ लोग महिला को सड़क पर घसीटते और मारपीट करते नजर आ रहे हैं। महिला खुद को निर्दोष बताती रही, लेकिन भीड़ पर अफवाह का ऐसा असर था कि किसी ने उसकी एक न सुनी। बाद में स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप और सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, तब जाकर स्थिति नियंत्रित हुई।