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Mandla News: कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्य जीव गणना के दौरान बायसन का हमला, वनरक्षक गंभीर रूप से घायल

Sat, 31 May 2025 05:39 PM IST
मंडला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला

सार

यह घटना बाबूझिरिया बीट में हुई, जहां वनरक्षक वे 'फेज-4 ट्रांजेक्ट लाइन सर्वे' कर रहे थे। हमले में उनके पेट, छाती, रीढ़ और पसलियों में गंभीर चोटें आईं। उन्हें बिछिया अस्पताल से होते हुए मंडला और फिर जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। 
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घायल वन कर्मी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कान्हा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत फेन अभयारण्य में वन्यप्राणी गणना के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब एक जंगली बायसन ने ड्यूटी पर तैनात वनरक्षक दिलीप कुमार रजक पर अचानक हमला कर दिया। हमले में वनरक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उन्हें पहले बिछिया अस्पताल, फिर मंडला जिला अस्पताल और अंततः जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
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घटना रविवार सुबह बाबूझिरिया बीट की है, जहां वनरक्षक दिलीप रजक 'फेज-4 ट्रांजेक्ट लाइन सर्वे' के तहत वन्यप्राणियों की गणना कर रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों से निकले एक बायसन ने उन पर अचानक हमला कर दिया। बायसन के तेज सींगों की चपेट में आकर दिलीप रजक के पेट और सीने में गंभीर चोटें आईं। शोर सुनकर पास ही मौजूद अन्य वनकर्मी मौके पर पहुंचे और तत्काल सूचना परिक्षेत्र अधिकारी रेवाराम झरिया को दी।

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रेवा झरिया ने तुरंत घायल वनरक्षक को बिछिया अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एम्बुलेंस से मंडला जिला चिकित्सालय लाया गया। सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे के अनुसार, दिलीप रजक की रीढ़ की हड्डी और पसलियों में फ्रैक्चर है, साथ ही पेट में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं। स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है, जहां विशेषज्ञों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।

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कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर (कोर) पुनीत गोयल ने बताया कि घायल वनरक्षक जबलपुर के अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। उन्हें मल्टीपल फ्रैक्चर और मांसपेशियों में भी गंभीर चोटें आई हैं। वन विभाग द्वारा इलाज और परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

गौरतलब है कि इस समय पूरे टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणी गणना का कार्य चल रहा है, जिसके लिए वनकर्मियों को गहन जंगलों में ट्रांजेक्ट लाइन सर्वे करना होता है। इस दौरान ऐसे जंगली जानवरों से खतरा बना रहता है, जिनकी संख्या और मूवमेंट का आंकलन इसी सर्वे के माध्यम से किया जाता है।
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