अपर सत्र न्यायालय (निवास) ने बबलू पंडा हत्याकांड में सात आरोपियों को आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि तीन को बरी किया। 2021 में पैसों के विवाद में ढाबे पर गोली मारकर हत्या हुई थी। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सात लोगों को दोषी पाया, जबकि तीन अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने आकाश सोनकर, अमित श्रीवास्तव, हनी उर्फ हिमांशु सोनकर, विशाल चक्रवर्ती, रोहित सोनकर, सौरभ सोनकर और सुखदेव उर्फ बाबा सोनकर को आजीवन जेल में रहने की सजा सुनाई। वहीं नीरज सोनकर, कैलाश उर्फ दस्सू यादव और सुमित उर्फ सिद्धार्थ यादव को बरी कर दिया है।
दोषियों पर केवल जेल ही नहीं, बल्कि आर्थिक दंड भी लगाया गया है। धारा 302/149 (हत्या) आजीवन कारावास और 5000 जुर्माना है। धारा 148 (बलवा) में 2 वर्ष सश्रम कारावास और 1000 जुर्माना है। आयुध अधिनियम 2 वर्ष सश्रम कारावास के साथ 1000 जुर्माना है।
क्या था मामला घटना 12 अगस्त 2021 की रात की है। ग्राम उदयपुर स्थित दशमेश ढाबा के पास पैसों के लेनदेन को लेकर हुए विवाद में आरोपियों ने ढाबे के भीतर घुसकर बबलू पंडा पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। हमले में बबलू पंडा की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले को पुलिस अधीक्षक ने ''सनसनीखेज'' श्रेणी में रखा था। तत्कालीन थाना प्रभारी राजेंद्र बर्मन ने मामले की विस्तृत विवेचना की। कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी उज्ज्वला उइके ने प्रभावी पैरवी की।