धर्मनगरी महेश्वर में सोमवार को आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (स्नान पूर्णिमा) पर भगवान जगन्नाथ का प्राकट्योत्सव वैदिक परंपराओं और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी पावन तिथि पर भगवान जगन्नाथ के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है। इसे देव स्नान का पर्व भी माना जाता है, इसलिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विधि-विधान से पवित्र जलाभिषेक किया गया।
जगन्नाथ मंदिर महेश्वर
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जगन्नाथ धाम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सर्वप्रथम परम पूज्य गुरुमाता महंत श्री जगत गिरि एवं महंत हृदय गिरि महाराज ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का जलाभिषेक किया। इसके बाद विद्वान विप्रजनों के मंत्रोच्चार के बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं को भी भगवान का नर्मदा जल से अभिषेक करने का अवसर मिला। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए भगवान से सुख, शांति और लोककल्याण की कामना की।
महाभिषेक के उपरांत भगवान का शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार आकर्षक हाथी बेसा (गजवेश) शृंगार किया गया। अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए तथा महाआरती के साथ जन्मोत्सव का मुख्य आयोजन संपन्न हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं में महाप्रसादी का वितरण किया गया।
महंत हृदय गिरि महाराज ने बताया कि स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक अनासर गृह में विश्राम करेंगे। इस दौरान भगवान के पट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद रहेंगे और परंपरा के अनुसार औषधीय जड़ी-बूटियों से उनकी सेवा की जाएगी। 15 जुलाई को विशेष पूजन एवं ध्वज यात्राओं के साथ भगवान के पट पुनः खोले जाएंगे, जबकि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा नगर भ्रमण पर निकलेगी। प्राकट्योत्सव में महेश्वर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, युवा और धर्मप्रेमी शामिल हुए।