मध्य प्रदेश में शराबबंदी को लेकर उमा भारती फिर सक्रिय हुई हैं। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया, जो शिवराज की टेंशन बढ़ा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखा है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं। ऐसे में उनके सीधे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिख कर शराब के उनके बिन्दुओं के निराकरण करने की मांग के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उमा भारती ने एक दिन पहले बयान जारी कर कहा था कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव हो जाने दिए। अब तक मौन रही। प्रदेश की नई शराबनीति महिला विरोधी है। इससे मुझे आघात लगा है। उन्होंने कहा कि कई बार बातचीत करने के बावजूद बैकफुट पर आई। अब जेपी नड्डा को तीन पेज का पत्र लिखकर शराब के बिन्दुओं के निराकरण करने की मांग की है। इसमें कहा है कि मैं पार्टी लाइन नहीं तोड़ती हूं, लेकिन जिन विषयों पर मेरी आस्था होती है, उन्हें छोड़ नहीं सकती।
जेपी नड्डा को लिखे पत्र में कहा कि हमारे देश में नशा मुक्त समाज हो, यह पार्टी के एजेंडे में हमेशा रहा। पंजाब की प्रगति और फिर नशे में उड़ते पंजाब की कहानी सर्वविदित है। मध्य प्रदेश भी तेजी से प्रगति की ओर बढ़ता एक राज्य है, लेकिन वर्तमान में मध्य प्रदेश की नई शराब नीति प्रदेश को हर तरह से विनाश की दिशा में ले जा सकती है। मैं शराबबंदी को लेकर अपनी पार्टी के सभी निर्णायक व्यक्तियों से मुलाकात करके इस विषय पर वार्ता कर चुकी हूं। उन्होंने लिखा कि शराबबंदी मेरे निजी अहंकार का विषय नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश की महिलाओं के सम्मान और उनके परिवार की सुरक्षा, युवाओं की रोजी-रोटी और भविष्य से जुड़ा एक सामाजिक विषय है।
उमा ने कहा कि मेरी इस विषय पर जब भी मुलाकात और बातचीत हुई, उसे मैंने सार्वजनिक नहीं किया। क्योंकि मुझे सकारात्मक परिणाम आने का भरोसा रहा। इस वजह से कई बार मौन से मैं निंदा, उपहास एवं आलोचना की पात्र बनी। इसलिए अब मैं आपसे सार्वजनिक अपील करती हूं कि शराब व नशे पर पार्टी के वरिष्ठ जनों से आप परामर्श करके एक जैसी शराब नीति सभी भाजपा शासित राज्यों को लागू करने का निर्देश दें।
उमा ने शराब पीने के अहातों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आगे लिखा कि मुझे अभी भी शिवराज सिंह और उन सब भरोसा पर है, जिनसे मैं मुलाकात कर चुकी हूं। मुझे भरोसा है कि प्रदेश सरकार अपनी शराब नीति को वापस लेकर नई संशोधित नीति को आपके मार्गदर्शन में प्रस्तुत करेगी। उन्होंने आगे नड्डा को लिखा कि आप मेरा बहुत सम्मान करते हैं और मुझे जानते हैं कि मैं पार्टी लाइन नहीं तोड़ती हूं, लेकिन जिन विषयों पर मेरी आस्था होती है, उन्हें छोड़ नहीं सकती। आप पत्र में शराब के संबंध में उठाए गए बिंदुओं के निराकरण का मार्ग निकालिए।
पत्र में उमा ने गांव और शहरों में भीड़ को खुले अहातों में शराब पिलाने, किसी भी धार्मिक स्थल एवं शिक्षण संस्थाओं से शराब की दुकान की दूरी एवं निश्चित समय पर ही दुकान को खोलना, एक के बदले एक मुफ्त बोतल देने की दुकानदारों की नीति, मजदूरों की बस्तियों के पास शराब की दुकान एवं अहाते को लेकर पार्टी की नीति स्पष्ट करने व पार्टी की हर राज्य सरकार में उसका पालन करने के लिए बाध्य करने की मांग की है।