मध्यप्रदेश के एक बाघ अभयारण्य से करीब एक साल पहले दो बाघिनों को बचाकर बहेराहा वार्ड में इलाज के लिए लाया गया था। पशु वार्ड में रखी गई दो बाघिनों को मंगलवार को जंगल में फिर से छोड़ दिया गया। दोनों बाघिन की उम्र अब तीन साल से ज्यादा है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार ने कहा कि दोनों बाघिन को सीधी में संजय टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र से शावक के रूप में बचाया गया और उमरिया में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बहेरहा वार्ड में लाया गया।
करीब एक साल तक बहेराहा वार्ड में अब उन्हें सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व और फिर होशंगाबाद के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि वन्यजीव विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर बाघिनों को उनकी स्वतंत्र और प्राकृतिक आवाजाही के लिए जंगल में छोड़ दिया गया है।
इस बीच एक अन्य अधिकारी ने बताया कि राज्य के सभी बाघ अभयारण्यों को एक जून से जनता के लिए खोल दिया गया है। आगंतुकों को कोविड-19 उपयुक्त दिशा-निर्देशों के तहत बाघ अभयारण्य में प्रवेश की अनुमति है। मध्य प्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना सहित कई बाघ अभयारण्य प्रसिद्ध हैं।