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मध्य प्रदेश: रातापानी टाइगर रिजर्व से लगी जमीन पर लगे पेड़ नहीं कटेंगे, सरकार ने हाईकोर्ट में दिया जवाब

Fri, 13 May 2022 09:17 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

रातापानी टाइगर रिजर्व से लगी जमीन के मामले में लगी याचिका पर सरकार की तरफ से जवाब पेश कर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि निर्माण के दौरान कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले को अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 20 जून को सुना जाएगा।
 
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रातापानी टाइगर रिजर्व से लगी जमीन को फाइव स्टार होटल, रिसॉर्ट, स्वीमिंग पूल आदि अन्य निर्माण के लिए कौढ़ियों के भाव दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि जिस जमीन का आवंटन किया जा रहा है उसमें लगभग 25 हजार सागौन के पेड़ लगे हैं। जिनका मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये है और जमीन का आवंटन सिर्फ दो करोड़ रुपये में किया गया है। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश जवाब में कहा गया कि एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 20 जून को निर्धारित की है।
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बता दें कि याचिकाकर्ता अचल सिंह की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि रातापानी टाइगर रिजर्व से लगी हुई सीहोर जिले की लगभग 50 लाख वर्गफीट जमीन पर्यटन विभाग ने तीन चरणों में फाइव स्टार होटल, रिसॉर्ट, स्वीमिंग पूल सहित अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित की है। नियम विरुद्ध तरीके से भूमि का मद परिवर्तन कर उक्त भूमि सरकार ने पर्यटन विभाग को दी थी। पर्यटन विभाग ने कौढ़ियों के दाम उक्त भूमि सिर्फ दो करोड़ रुपये में आवंटित की है। याचिका में कहा गया था कि उक्त भूमि राजस्व रिकॉर्ड में निस्तार की भूमि के रूप में दर्ज थी। नियमानुसार निस्तार की भूमि का उपयोग जनहित में किया जाता है तथा उसके मद परिवर्तन के लिए केन्द्र सरकार की अनुमति आवश्यक है। इसके अलावा वन विभाग ने भी उक्त भूमि को अपना बताते हुए सरकार को पत्र लिखा है।

सरकार द्वारा उक्त भूमि को सीलिंग का बताया गया है और पर्टटन विभाग के आग्रह पर उसे प्रदान की गई है। सीलिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत भी जमीन का आवंटन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि सीहोर जिले में पानी की कमी है। इसके बावजूद भी व्यावसायिक उपयोग के लिए स्वीमिंग पूल के निर्माण की अनुमति प्रदान करते हुए जमीन का आवंटन किया गया है। याचिका में प्रमुख सचिव पर्यटन, राजस्व व वन विभाग, कलेक्टर सीहोर, एमडी एमपीटीबी तथा केन्द्र पर्यावरण विभाग के सचिव को अनावेदक बनाया गया है।
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याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में एक भी पेड़ नहीं काटने की जानकारी पेश की गई। जिसके बाद युगलपीठ ने अगली सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता राजेश पंचौली ने पैरवी की। 
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