कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से तीसरी लहर आने की आशंकाओं के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक बनी क्राइसिस मैनेजमेंट समितियों की बैठक की। उन्हें निर्देश दिए हैं कि दूसरी लहर में हम भयावहता देख चुके हैं। तैयार रहना बेहद जरूरी है। वैक्सीनेशन का कवरेज बढ़ाएं। अस्पताल जाएं। दवाइयों की स्थिति की जांच करें। जो भी जरूरी हो, फैसले लें और तीसरी लहर की आशंका को रोकें।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 17 नवंबर को प्रदेश में कोरोना के काबू होते ही सभी प्रतिबंधों को हटा लिया था। इसके बाद मंगलवार कोई कई प्रतिबंध दोबारा लागू किए गए हैं। स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई दोबारा शुरू हो गई है। इसी कड़ी में उन्होंने क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों की बैठक की। इस दौरान एसीएस (हेल्थ) मोहम्मद सुलेमान सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। सभी जिलों के प्रभारी मंत्री, कलेक्टर भी मौजूद थे।
चिंता इंदौर और भोपाल की
बैठक के दौरान बताया गया कि इससे पहले भी इंदौर-भोपाल में केस बढ़े। फिर अन्य इलाकों में फैलते गए। पहली और दूसरी लहर में हमने इसी तरह की स्थिति देखी है। पिछले सात दिन में प्रदेश में 118 नए केस सामने आए हैं। इसमें भी भोपाल में 53 और इंदौर में 48 केस सामने आए हैं। इसके बाद रायसेन (11) और जबलपुर (5) का नंबर है। चिंताजनक यह है कि नए केस क्लस्टर में नहीं मिले, बल्कि शहरों के अलग-अलग इलाकों में मिले हैं। इससे वायरस के फैलने और ज्यादा लोगों को संक्रमित करने का खतरा बना हुआ है।
क्राइसिस मैनेजमेंट समितियों को वीसी के माध्यम से संबोधन। #COVID19 #MPFightsCorona #MadhyaPradesh
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- Shivraj Singh Chouhan (@chouhanshivraj) 1 Dec 2021
वैक्सीनेशन में इंदौर अव्वल
इस दौरान वैक्सीनेशन के कवरेज के आंकड़े भी पेश किए गए। मध्य प्रदेश में 5.11 करोड़ पहले डोज लगाए गए हैं। प्रथम डोज के मामले में कवरेज 93% हो चुका है। दूसरे डोज का कवरेज 3.53 करोड़ लग चुके हैं। इसका कवरेज कुल आबादी का 64.4% तक पहुंच चुका है। फुल वैक्सीनेशन के मामले में इंदौर (85%) के साथ सबसे आगे है। उसके बाद खंडवा (79%), भोपाल (78%), जबलपुर (77%) और उज्जैन (76%) आते हैं। इसी तरह अलीराजपुर, बडवानी, सतना, झाबुआ, खरगोन में 50% के आसपास ही फुल वैक्सीनेशन हुआ है। इन जिलों में काफी कुछ करने की जरूरत है।
चौहान ने दी चेतावनी- सख्ती लाकर रोकना है
मुख्यमंत्री ने मीटिंग में कलेक्टरों, प्रभारी मंत्रियों और अन्य अधिकारियों को सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। उनसे साफ शब्दों में कहा है कि पहले की स्थिति नहीं बनना चाहिए। रेमडेसिविर से लेकर अन्य दवाओं तक के लिए मारामारी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पर्याप्त इंतजाम हो, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट की भी जांच की जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर परेशानी का सामना न करना पड़े।