छिंदवाड़ा में ग्रामीण सड़क योजना में बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने जांच के बाद मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं। पांच अन्य प्रकरणों की जांच की जा रही है। सड़क निर्माण के पांच पैकेज में 1.55 करोड़ रुपये से अधिक राशि के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EoW) के एसपी देवेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि छिंदवाड़ा में ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी सड़कों में भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली थी। जांच में पता चला कि मोहरिया से बैलखेड़ी, करसिवार बांस से छातेआम, गोप से बारूखेडा और टी-11 से धारू तक सडक बननी थी। इस पैकेज के अंतर्गत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निर्माण कार्य में ठेकेदार को 26.35 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। EoW ने इस मामले में ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक एचके चंद्रवंशी, सहायक प्रबंधक एमके वर्मा, उपयंत्री राजेश मेश्राम, एआरई किशोर दास गुप्ता, एफई अतुल कनौजिया, तत्कालीन मुख्य प्रबंधक डीके पचौरी, ठेकेदार मेसर्स राज सिंह एंड कंपनी बालाघाट के साथ ही कंसल्टेंसी फर्म नायक सिंडीकेट, भोपाल के टीम लीडर प्रमोद श्रीवास्तव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
इसी तरह डुगरिया भरदागढ से चुरनी चौगान मार्ग, करमोहनी से भवेलीकला मार्ग, काली छापर से नादगा पिपरिया मार्ग की सड़क बनाने में ठेकेदार को फर्जी दस्तावेज के आधार पर 76 लाख 22 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। अमरवाडा खउआ से लाटगांव मार्ग के निर्माण में ठेकेदार को करीब 7.27 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया है। खिरकी घाट से चारगांव तक की सड़क में ठेकेदार को 39.80 लाख रुपये और नवेगांव मेहदावीर से हरियागढ, आकिया से धोबीघाट मार्ग तक सड़क बनाने में 6.10 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।