आदेश के अनुसार, कर्फ्यू लगाये गए इलाके में कोई भी व्यक्ति अत्यावश्यक कार्यों (मेडिकल इत्यादि) को छोड़कर घर से बाहर नहीं निकलेगा; सभी व्यावसायिक संस्थान, दुकानें, उद्योग आदि पूर्णत: बंद रहेंगे। केवल अस्पताल व मेडिकल दुकानें खुली रहेंगी। वहीं, धारा 144 लगे इलाकों में पांच या पांच से अधिक लोगों के समूह के घूमने व खड़े होने पर रोक लगाई गई है।
क्या है मामला
इसी बीच, भोपाल के पुलिस उपमहानिरीक्षक इरशाद वली ने बताया कि ऐहतियाती तौर पर ये प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक न्यास (ट्रस्ट) को लेकर यह जमीन विवाद है। अदालत में चले इस विवाद को इस न्यास ने जीत लिया है और रविवार को यह न्यास इस जमीन पर कब्जा करने जा रहा है। वली ने बताया कि इस घटनाक्रम को लेकर तनाव का डर था, इसलिए ऐहतियाती तौर यह कर्फ्यू एवं धारा-144 लगाई गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इलाके में अवरोधक लगाये हैं और इन इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुराने भोपाल में जमीन के एक हिस्से को लेकर दक्षिणपंथी संगठन ने कानूनी लड़ाई जीती है। अदालत के आदेश के बाद रविवार को संगठन इस जमीन पर कब्जा ले रहा है। संगठन इस जमीन पर चारदीवारी का निर्माण करा रहा है। प्रशासन को आशंका है कि स्थानीय लोग इस मौके पर हंगामा कर सकते हैं। पुराने भोपाल के रास्तों को सील कर दिया गया है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। पुलिस ने विगत देर रात से ही यहां बैरिकेड्स लगाना शुरू कर दिए थे। इलाके के लोगों को घरों में ही रहने की हिदायत दी जा रही है और राह से गुजरने वाले लोगों को वापस लौटाया जा रहा है।