सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि सत्येंद्र ऐसे पहले भारतीय हैं जिन्होंने 75 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद भी अरब सागर में 36 किलोमीटर तक तैराकी की। सत्येंद्र जानते थे कि वह अपने निचले अंगों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं बावजूद इसके वह इंग्लिश चैनल में 36 किलोमीटर डोवर स्ट्रेट तैराकी के लिए तैयार हो गए।
इससे पहले कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के एम रहमान बायदा दुनिया के ऐसे पहले तैराक थे जिन्होंने घुटनों के नीचे के हिस्सों की अपंगता के होते हुए भी जुब्राल्टा की खाड़ी को पार किया था।
25 सितंबर, 2001 को रहमान ने खतरनाक लहरों से लड़ते हुए इस विजय अभियान को पार किया। इसके लिए उन्हें 4 घंटे 20 मिनट का वक्त लगा। इसके अलावा वह एशिया के ऐसे पहले विकलांग तैराक थे जिन्होंने 1997 में इंग्लिश चैनल पार किया था।