मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद सरकार ने जिला कलेक्टरों को परिसीमन के आदेश जारी किए हैं। जिसके तहत प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने से पूर्व पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्य प्रदेश ने आदेश जारी कर वार्ड प्रभारियों से 17 जनवरी 2022 तक उनके क्षेत्र की जनसंख्या से संबंधित जानकारी मांगी गई है। आदेश के मुताबिक प्रदेश की पंचायतों में परिसीमन की प्रक्रिया 17 जनवरी से शुरू होगी और 28 फरवरी 2022 तक चलेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश-2021 के तहत पंचायतों का परिसीमन किया जाना है। परिसीमन के लिए जनसंख्या का आधार 2011 की जनगणना को रखा जाएगा।
पंचायत का गठन मुख्यालय से गांवों की दूरी, किसी बांध या सिंचाई परियोजना के कारण गांव के डूब में आने या परिसीमन से छूटने के आधार पर होगा। जिसके लिए क्षेत्र की न्यूनतम जनसंख्या एक हजार होना अनिवार्य रहेगा। वहीं निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण ग्राम पंचायत की जनसंख्या के आधार पर तय होगा। जिन पंचायतों की जनसंख्या एक हजार तक होगी उनमें 10 वार्ड होंगे। 10 हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले पंचायतों में 20 वार्ड बनाए जा सकेंगे। पंचायत के लिए प्रारंभिक प्रकाशन 17 जनवरी को किया जाएगा। वहीं दावे, आपत्ति एवं सुझाव 25 जनवरी तक स्वीकार किए जाएंगे। इनके निराकरण के लिए 3 फरवरी को ग्राम पंचायत के गठन की अंतिम सूचना का प्रकाशित की जाएगी। वहीं वार्डों के निर्धारण की अधिसूचना 23 फरवरी को जारी होगी।
जनपद और जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण भी पंचायत के जैसे ही होगा। पंचायतों का परिसीमन होने से जनपद पंचायत के निर्वाचन क्षेत्रों में संशोधन होगा। नए आदेश के मुताबिक प्रत्येक जनपद पंचायत क्षेत्र में न्यूनतम 10 निर्वाचन क्षेत्र होंगे। वहीं 50 हजार से अधिक जनसंख्या होने पर निर्वाचन क्षेत्रों को अधिकतम 25 वार्डों में विभाजित किया जाएगा। जिला पंचायतों में कम से कम 10 निर्वाचन क्षेत्र बनाए जाएंगे। 5 लाख से अधिक जनसंख्या होने पर यह अधिकतम 35 तक हो सकते हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने कलेक्टरों को जनपद और जिला पंचायत के परिसीमन की प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी करके प्रतिवेदन राज्य शासन को भेजने का निर्देश दिया है।
बता दें कि प्रदेश में पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद राज्य सरकार ने पंचायतों के संचालन की जिम्मेदारी सरपंच और सचिवों को दी लेकिन बाद में इस आदेश को वापस ले लिया गया था। सरपंच और सचिव वित्तीय अधिकार की मांग कर रहे थे, सरपंचों की लामबंदी को देखते हुए सरकार ने नए आदेश जारी कर पंचायत सचिवों से जनसंख्या की जानकारी मांगी है। विपक्ष भी पंचायत चुनाव पर सरकार को लगातार घेर रहा है। कुछ दिन पहले ही पूर्व सीएम कमलनाथ ने सीएम शिवराज से आगामी दो माह में पंचायत चुनाव न कराने पर गांवों में आंदोलन की चेतावनी दी थी।