फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मध्य प्रदेश: इंदौर के बजाय धार से भोपाल ले गए तेंदुए के शावकों को, एक की मौत, एक गंभीर

Tue, 14 Dec 2021 01:03 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

धार में मिले शावकों में से एक की मौत हो गई। एक की हालत नाजुक बनी हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि जब इन्हें इंदौर के चिड़ियाघर भेजा जा सकता था, तो भोपाल के वन विहार क्यों भेजा गया? अगर इंदौर भेजा जाता तो शायद शावकों की जान बचाई जा सकती थी। 
विज्ञापन
धार में मिले शावकों का फाइल फोटो। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

धार जिले की कुक्षी तहसील के गांव बाजरीखेड़ा में मिले तेंदुए के दो शावकों को रेस्क्यू करने में वन विभाग नाकाम रहा। इन्हें इंदौर के चिड़ियाघर में भेजा जाना था। इसके बजाय वन विभाग ने इन्हें भोपाल भेज दिया। इन शावकों में से एक की मौत हो गई, एक की हालत नाजुक बनी हुई है। बताया जा रहा है कि ठंड लगने से इन शावकों की तबियत बिगड़ी है। 
विज्ञापन


प्राप्त जानकारी के अनुसार धार जिले के बाजरीखेड़ा गांव में किसान किरण गिरी को अपने खेत में शावक मिले थे। वह इन्हें बिल्ली के बच्चे समझकर घर ले गया था। 10 दिसंबर को उसने धार के वन विभाग को इन शावकों को सौंप दिया। वन विभाग ने पिंजरे में फिर खेत में रखा। यह सोचा गया कि शावकों की मां आएगी और उन्हें ले जाएगी। पर शावक की मां नहीं लौटी। तब  दोनों शावकों को पहले इंदौर चिड़ियाघर भेजे जाने की योजना बनी। बाद में अचानक योजना को बदला गया और उन्हें भोपाल में वन विहार भेजा गया। इस दौरान एक शावक की मौत हो गई, वहीं दूसरे की हालत नाजुक है। 

धार के डीएफओ अक्षय राठौड़ का कहना है कि वन्यप्राणी नियमों के तहत शावकों को उन जगहों पर ले जाया जाता है, जहां वे मिले हैं। उम्मीद थी कि शावकों की मां आकर उन्हें ले जाएगी। जब मां नहीं आई तो हमने इंदौर चिड़ियाघर से संपर्क साधा। उन्होंने कहा कि जगह नहीं है। इस वजह से भोपाल ले गए। वहीं, वन विहार के डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार जैन ने बताया कि धार जिले से जो शावक लाए गए थे, उनमें से एक की मौत रविवार रात को हुई। दूसरे की हालत नाजुक बनी हुई है। 
विज्ञापन


क्या ठंड की वजह से गई जान? 
इस सवाल का जवाब फिलहाल वन विभाग के पास नहीं है। अधिकारी नियमों का हवाला दे रहे हैं। हकीकत यह है कि शावक दो दिन किसान के घर रहे। हो सकता है कि इस दौरान उनकी मां ने खेत में जाकर शावकों की तलाश की होगी। तीसरे दिन शावकों को ठंड में रखा गया। फिर इंदौर के बजाय भोपाल तक वाहन से ले जाना भी शावकों के लिए जानलेवा साबित हुआ। 
विज्ञापन


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें