मध्यप्रदेश में सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इसके तहत शासकीय सेवकों को देय महंगाई भत्ते में 5 प्रतिशत वृद्धि का निर्णय लिया गया। बैठक में शासकीय सेवकों, पेंशनरों, शिक्षक संवर्ग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पंचायत सचिवों और स्थायी कर्मियों को देय महंगाई भत्ता/महंगाई राहत की दर में एक जुलाई 2019 से सातवें वेतनमान में 5 प्रतिशत की वृद्धि यानि 12 प्रतिशत को बढ़ाकर 17 प्रतिशत किए जाने को मंजूरी दी गई। इसके अलावा छठवें वेतनमान में 10 प्रतिशत की वृद्धि यानि 154 प्रतिशत को बढ़ाकर 164 प्रतिशत करने के फैसले को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। महंगाई भत्ता/महंगाई राहत की बढ़ी हुई राशि का भुगतान मार्च 2020 के वेतन/पेंशन (माह अप्रैल 2020 में देय) से किया जाएगा। एक जुलाई 2019 से 29 फरवरी 2020 की अवधि के एरियर की राशि के भुगतान के लिए अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
लोक सेवा आयोग में 2 सदस्य नियुक्त
कैबिनेट ने रामू टेकाम और राशिद सुहैल सिद्दीकी को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त करने का अनुमोदन किया। बैठक में मध्यप्रदेश रेत (खनन,परिवहन,भण्डारण एवं व्यापार) नियम 2019 में संशोधन के लिए 7 फरवरी 2020 को मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में जारी अधिसूचना को भी अनुमोदित किया गया।
नोवल कोरोना वायरस का प्रसार रोकने पर हुई चर्चा
राज्य में नोवल कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रसार को रोकने के लिए जारी दिशा-निर्देशों पर भी कैबिनेट में चर्चा हुई । बैठक में जानकारी दी गई कि भारत सरकार द्वारा उच्च स्तरीय मंत्री समूह का गठन किया गया है, जो स्थिति की सूक्ष्मता से समीक्षा कर रहा है । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा संसद में सामूहिक समारोहों और अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है । सामूहिक स्तर पर समारोहों की अनुमति नहीं देने के लिए भी निर्देशित किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार राज्य सरकारों से नोवल कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने का आग्रह कर रहा है । मध्यप्रदेश सरकार भी इस दिशा में आवश्यक कदम उठा रही है।
राज्य में स्कूल, कॉलेज, आंगनवाड़ी, सार्वजनिक पुस्तकालय, वाटर पार्क, जिम, स्वीमिंग पूल, सिनेमा हॉल और मैरिज हॉल को आगामी आदेश तक बंद रखने, आधिकारिक यात्रा, प्रशिक्षणों और सार्वजनिक समारोहों को स्थगित रखने और 20 से अधिक लोगों की सभाओं के आयोजन को रोकने के लिए कानूनी उपाय किये जा रहे हैं।