मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात कराने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 19 सप्ताह और छह दिन का गर्भ गिराना गर्भपात के कानूनी दायरे में आता है। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों की एक टीम द्वारा पीड़िता की चिकित्सीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद अदालत ने यह निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने कहा कि पीड़िता महज 12 साल की है और नाबालिग है इसलिए वह यौन संबंध के लिए सहमति देने की स्थिति में नहीं थी। गर्भपात को इस रूप में मानना चाहिए कि यह गर्भ बलात्कार की वजह से था।
याचिकाकर्ता के वकील बीएस ठाकुर ने कहा कि कोर्ट ने आदेश दिया है कि भ्रूण के डीएनए की जांच के लिए इसे फॉरेंसिक लैब में भेजा जाए। पीड़िता की मां ने गर्भपात को लेकर याचिका दायर की थी। लड़की के गर्भवती होने का खुलासा उस समय हुआ था जब उसने पेट में दर्द की शिकायत की थी और उसके घरवाले उसे डॉक्टर के पास ले गए थे।