मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार की बाल कल्याण समिति (CWC) के आदेश पर रोक लगा दी है। सागर की बाल कल्याण समिति ने सेंट फ्रांसिस अनाथालय से कोविड-19 महामारी और अत्यधिक ठंड के इस मौसम में 44 बच्चों को कहीं और भेजने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी जायज कारण के फिलहाल ऐसा न किया जाए।
हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में सागर जिला की बाल कल्याण समिति से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की है। साथ ही राज्य सरकार, महिला एवं बाल कल्याण विभाग समेत अन्य को 3 हफ्ते में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। बच्चों को अनाथालय से कहीं और शिफ्ट किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस नंदिता दुबे ने गुरुवार को कहा कि मुझे लगता है कि इस समय बच्चों को शिफ्ट नहीं करने का आदेश अधिकारियों को देना ठीक होगा। कोर्ट के आदेश के मुताबिक "रिकॉर्ड पर ऐसी किसी परिस्थिति का उल्लेख नहीं है, जिसके आधार पर अनाथालय से बच्चों को किसी और जगह शिफ्ट किया जाए।" जस्टिस दुबे ने कहा कि बच्चों को शिफ्ट करने के 29 दिसंबर के आदेश पर रोक लगाई जाती है।
ठंड में बच्चों को शिफ्ट करने की जरूरत क्या है?
हाईकोर्ट ने सागर जिले की बाल कल्याण समिति को एक रिपोर्ट जमा करने के आदेश दिए हैं। इसमें समिति को बताना होगा कि जब कोविड-19 केस लगातार बढ़ रहे हैं और प्रदेश में भीषण ठंड पड़ रही है, तब बच्चों को शिफ्ट क्यों किया जा रहा है? रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि बच्चे जिस अनाथालय में इस समय रह रहे हैं, वहां की क्या परिस्थिति है। जहां इन 44 बच्चों को शिफ्ट किया जाना है, वहां जगह की उपलब्धता या स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।
अनाथालय ने लगाई थी याचिका
सागर के सेंट फ्रांसिस अनाथालय के सचिव फादर सिंटू वर्गीज ने बाल कल्याण समिति के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनके वकील अमित मिश्रा का दावा है कि पुलिस के माध्यम से बाल कल्याण समिति न केवल आदेश में उल्लेखित 3 बच्चों को हटाना चाहती थी, बल्कि बचे हुए 41 बच्चों को भी वहां से शिफ्ट करना चाहती है।