मध्यप्रदेश में जारी कोरोना संकट के कारण दिनों दिन हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। यहां कोरोना के एक्टिव केसों की संख्या 90 हजार के करीब पहुंचने वाली है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अनुमान लगाया है कि मई के पहले और दूसरे सप्ताह में देश में प्रतिदिन कोरोना के करीब सात लाख केस सामने आ सकते हैं। ऐसे में मरीजों की बढ़ती संख्या और डॉक्टरों व नर्सों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी ने निलंबित मेडिकल कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश दिया है, ताकि यह स्टाफ कोरोना काल में सेवा दे सकें।
निलंबित मेडिकल स्टाफ को बहाल कने के आदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी ने सभी रीजनल डायरेक्टर्स को भेजे आदेश में निलंबित तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, कंपाउंडर, फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर को तत्काल बहाल करने को कहा है। इसके साथ ही मैदानी कर्मचारियों एएनएम, एमपीडब्ल्यू, पर्यवेक्षक बीईई को बहाल कर कोरोना मरीजों के इलाज संबंधी सेवाओं में ड्यूटी लगाने के आदेश दिए हैं।
ड्यूटी ज्वॉइन न करने पर कार्रवाई
वहीं, सूत्रों की मानें तो अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगाने के पहले यानी 30 मार्च को 20 दिन में ज्वॉइनिंग के आदेश के बावजूद 186 डॉक्टरों ने ड्यूटी ज्वॉइन नहीं की। इस संबंध में स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी ने चिकित्सा शिक्षा आयुक्त निशांत वरवड़े को पत्र लिखकर ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई को कहा है।
जानें क्या है एस्मा
एस्मा के तहत अति आवश्यक सेवा से जुड़े कर्मचारी व अधिकारी अवकाश या हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। इस कानून का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधाव है। इस कानून के लागू होने के बाद सरकार को अवकाश या हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है।
बता दें कि हाल ही में कोरोना महामारी में जिम्मेदारी संभालने में विफल रहे स्वास्थ्य आयुक्त व लोक स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग के सचिव डॉक्टर संजय गोयल को हटा दिया गया था। उनकी जगह आकाश त्रिपाठी को जिम्मेदारी सौंपी गई। त्रिपाठी मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर में प्रबंध संचालक और ऊर्जा विभाग के सचिव रह चुके हैं। उनके पास पूर्व की जिम्मेदारी बतौर अतिरिक्त प्रभार रहेगी।