मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी ने कमर पूरी तरह से कस ली है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार चुनाव सॉफ्ट हिंदुत्व मुद्दे के साथ लड़ने की योजना बनाई है। पिछले 15 सालों से मध्यप्रदेश में काबिज भाजपा की शिवराज सरकार को किनारे लगाने के लिए कांग्रेस भगवान राम का सहारा लेगी। इसी कड़ी में पार्टी ने प्रदेश में राम वन गमन पथ यात्रा शुरू कर दी है।
यह रथयात्रा चित्रकूट से चलकर सात जिलों की 27 सीटों से गुजरेगी। इन 27 में से 15 सीटें भाजपा, 11 कांग्रेस और एक बसपा के पास है। रास्ते में 75 बड़े मंदिर पड़ेंगे इनमें 70 राम मंदिर हैं। 820 किमी की यात्रा कर रथ 15 अक्टूबर को चित्रकूट पहुंचेगा, जहां यात्रा समाप्त होगी।
राजनीति के जानकार इस पूरी यात्रा को राहुल गांधी का सॉफ्ट हिंदुत्व एजेंडा बता रहे हैं। विंध्य की इन सीटों का जातिगत महत्व भी है। यहां जितने सवर्ण हैं, उतने ही आदिवासी और अन्य भी हैं जिनका वोटो पर खासा असर रहा है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि राम रथ विंध्य में पार्टी को मजबूत करेगा।
राम वन गमन पथ क्या है
राम वन गमन पथ की शुरुआत 2004 में उमा भारती की सरकार में की गई थी। इस पूरे पथ को टूरिज्म सर्किट बनाने की घोषणा भी की गई थी। 14 साल पहले की गई इस घोषणा पर अभी तक 33 करोड़ खर्च हुआ। 2007 में शिवराज ने पथ को बनाने का वादा किया।
शोध के लिए 11 विद्वानों की समिति भी बनाई। फिर 2011 में इस 11 लोगों की समिति ने रिपोर्ट सरकार को दी। इसपर दो चरणों में सर्वे भी किया गया। 2018 तक इसपर 33 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इस पूरे पथ पर अब कांग्रेस अपना रथ निकाल रही है।
क्यों निकाल रही है कांग्रेस रथ यात्रा
अगर रामायण में भगवान राम के वनवास की बात करें तो अयोध्या से लगभग 84 कोस यानी 260 किमी दूर चित्रकूट में ही राम ने अपने वनवास के करीब 12 साल बिताए थे। अयोध्या से लंका तक पूरे राम वन गमन पथ पर 13 पड़ाव आते हैं। उनमें तीन चित्रकूट, सतना और दंडकारण्य का एक हिस्सा मध्यप्रदेश में है। बताते हैं कि वनवास के दौरान राम जिन रास्तों से निकले थे, उनसे जुड़े 249 स्थल मध्यप्रदेश में ही हैं और इनकी पहचान भी कर ली गई है। इनमें से कई स्थान सतना, रीवा, पन्ना, छतरपुर, शहडोल और अनूपपुर जिले में मौजूद हैं।