शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार ने ग्वालियर जिले की 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा की स्थिति के आकलन के लिए खुफिया विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। सरकार इन सीटों में जनता के मूड का अनुमान लगाना चाहती थी और इसी के आधार पर सत्ताधारी पार्टी यहां उम्मीदवारों का चयन करती। खुफिया रिपोर्ट साल 2013 के विधानसभा चुनाव परिणामों से बिलकुल उलट है। इस रिपोर्ट से भाजपा नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 में से 2 विधानसभा सीटों पर भाजपा की स्थिति संतोषजनक है। जबकि बाकी 4 में स्थिति नाजुक है। सर्वे में शामिल 6 सीटों में से 2 पर काबिज विधायक सरकार में कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इन तीन मंत्रियों में से दो मंत्रियों को विपक्षी उम्मीदवार कड़ी चुनौती दे सकते हैं। राहत की बात यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव परिणाम की तरह यहां इस बार भी किसे तीसरे दल की कोई खास उपस्थिति नहीं रहेगी। जबकि साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मुरार (ग्रामीण) सीट से जीते थे।
हालांकि खुफिया विभाग की रिपोर्ट का कहना है कि अगर चुनाव मैदान में जिताऊ उम्मीदवार को उतारा जाए तो नतीजे बदल सकते हैं। खबरों के मुताबिक सरकार को यह खुफिया रिपोर्ट मिल गई है। पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में अभी हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
रिपोर्ट में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का जिक्र
खबरों के मुताबिक खुफिया विभाग की रिपोर्ट में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का भी जिक्र है। उन्होंने इसे कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी बताया है। प्रदेश में कांग्रेस, नेतृत्व के नाम पर अभी भी बंटी हुई है।
टिकट बंटवारे को लेकर दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया आपस में भिड़े पड़े हैं। दोनों नेताओं के समर्थकों में भी एकजुटता नहीं है। ऐसे में भाजपा किसी मजबूत नेता को अपना प्रत्याशी बनाए तो पार्टी को फायदा मिल सकता है।
रिपोर्ट में 6 सीटों के जमीनी हालात बताए
* वोटर भाजपा विधायकों से नाराज हैं।
* स्वास्थ्य, सड़क और सफाई व्यवस्था की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है, जो नाराजगी की वजह है।
* पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्थिति खस्ताहाल है।
* ग्वालियर जिला स्मार्ट सिटी में भले ही शुमार किया गया हो, लेकिन इंदौर, जबलपुर और भोपाल की तुलना में यहां योजनाओं को लागू नहीं किया जा सका है।
* एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन से सवर्ण वोटर भाजपा के खिलाफ हैं।
* पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम से भी जनता में रोष।
* भाजपा के 2 मंत्रियों के कामकाज से उनके क्षेत्र के मतदाता खुश नहीं हैं।